अपोलो को फर्श से अर्श तक पहुंचाने वाली रेड्डी सिस्टर्स

अपोलो को फर्श से अर्श तक पहुंचाने वाली रेड्डी सिस्टर्स

आज महिलाएं हर क्षेत्र में परचम लहरा रही हैं, और ऐसे ही महिलाओं की कारोबार क्षेत्र में लगातार बढ़ रही है। किरण मजूमदार से लेकर इंद्रा नूई तक कई बड़े नाम इस लिस्ट में शामिल हैं। इसी क्षेत्र अपने काम का लोहा मनाने वाली 4 रेड्डी बहनें भी हैं। चेन्नई की रहने वाली ये रेड्डी बहनें आज भारत के सबसे बड़े हॉस्पिटल ग्रुप में से एक अपोलो हॉस्पिटल की मालकिन हैं। यह बहनें सुनीता, शोभना, संगीता और प्रीता, रेड्डी सिस्टर्स के नाम से काफ़ी फेमस हैं। इन बहनों ने बेहद ही मुश्किल दौर से गुजर रहे अपोलो हॉस्पिटल ग्रुप को आज एक नए मुकाम पर पहुंचाया है। आज ये बहनें 2 बिलियन अमेरिकी डॉलर यानी करीब 200 करोड़ रुपये डॉलर के हेल्थ एंपायर की मालकिन हैं। 
करीब एक दशक पहले इन बहनों ने अपने पिता प्रताप रेड्डी के डूबते हुए कारोबार संभाला था। जब इन चारों बहनों ने काम-काज संभाला था तब अपोलो हॉस्पिटल के हालात काफ़ी खराब थे। उस दौरान उनका कारोबार मुश्किलों के दौर से गुजर रहा था। इन रेड्डी बहनों ने अपने कारोबार के लिए एक रणनीति तैयार की, जोकि बहुत काम की साबित हुईं और उसकी वजह से उनका कारोबार नए शिखर पर पहुंच गया है। 86 वर्षीय प्रताप रेड्डी आज भी अपोलो के चेयरमैन हैं। उनकी दो बेटियां प्रीता और शोभना वाइस चेयरमैन हैं और संगीता व सुनीता रेड्डी बतौर कार्यकारी निदेशक के रुप में कार्य कर रही हैं। 
59 साल की अपोलो की को-मैनेजिंग डायरेक्टर सुनीता रेड्डी ने आपने प्लान के बारे में  बात करते हुए कहा कि जब उन्होंने उनके पिता से कारोबार की बागडोर संभाली तो सबसे पहले हेल्थ के क्षेत्र में डिमांड और सप्लाई के बारे में स्टडी किया, फिर उन्होंने यह देखा कि छोटे शहरों के भी लोग इलाज पर अपने पैसे खर्च करना चाहते हैं, लेकिन उन लोगों को उचित इलाज नहीं मिल पा रहा है, और अभी तक किसी का भी ध्यान इस तरफ नहीं गया था, तो उन्होंने इस बात पर ध्यान देते हुए इन बहनों ने छोटे शहरों पर भी फोकस करना शुरू कर दिया। उनको यह उम्मीद थी कि भारत की इकोनॉमिक ग्रोथ के साथ छोटे शहरों के लोगों के स्पेंडिंग कैपेसिटी बढ़ जाएगी। उन बहनों की यह रणनीति और कामगार साबित हुई और 2015 के बाद पहली बार ग्रुप ने मुनाफा कमाना शुरू कर दिया था। अपोलो अब तक कई छोटे शहरों में अस्पताल, क्लिनिक और मेडिकल स्टोर खोल चुका है, और इस वजह से कंपनी के शेयरों की कीमत पिछले चार सालों में जाकर के कई फीसदी बढ़ गई है। अपोलो ने ना सिर्फ अस्पताल खोले, बल्कि उसमें कई काबिल डॉक्टरों को नियुक्त किया जिससे लोगों को अच्छा इलाज मिल सके।
प्रीता रेड्डी इस कंपनी को मैनेज करती हैं, सुनीता रेड्डी वित्त की संयुक्त प्रबंध निदेशक हैं, शोभना फार्मेसी और बीमा का काम संभालती हैं, तो वहीं संगीता क्लिनिक, शिक्षा और टेलीमेडिसिन का काम देखती हैं। प्रीता ने एक इंटरव्यू में बताया था कि वह एक ऐसा अस्पताल खोलना चाहती थी जिसमें सभी के साथ एक समान व्यवहार किया जाए। उन्होंने कहा कि वह डॉक्टर बनना चाहतीं थीं, लेकिन किस्मत ने उनके लिए कुछ और सोचा था। जब वह युवा अवस्था में थीं तब वह अपने पिता के साथ विदेश चली गई थी और जब वह भारत वापस आई तो उनको मद्रास के मेडिकल कालेज में दाखिला मिल गया था लेकिन उनके पिता ने इसके लिए इंकार कर दिया। प्रीता एक प्रशिक्षित शास्त्रीय डांसर हैं, इसके अलावा उन्होंने रसायन में डिग्री की हुई है। 
सुनीता रेड्डी ने इस बिजनेस को 1989 में ज्वाइन किया था, उन्होंने अपने पिता के इस डूबते बिजनेस को 2005 में 70 मिलियन का मुनाफा कराया था, व रेड्डी परिवार की तीसरी बेटी शोभना फॉर्मेसी का काम संभालती हैं, इनके इस काम के दौरान ढाई गुना फॉर्मेसी का काम बढ़ा था और इसका मुनाफा करीब 203 मिलियन हुआ। चौथी बेटी सुनीता एक आईटी स्पेशलिस्ट है, उन्होंने साल 1999 में अपोलो हेल्थस्ट्रीट नाम से एक कम्पनी की शुरुवात की थी। उनकी यह कम्पनी मेडिकल बिलों पर काम करती थी, जो कि साल 2012 में 250 मिलियन में बिक गई थी, जिसके बाद सुनीत ने एजुकेशन पर ध्यान देना शुरू किया, जिस वजह से हैदराबाद में अपोलो का एक मेडिकल कॉलेज और ग्यारह नर्सिंग स्कूल हैं। उन्होंने डायबिटीज पेशेंट्स के लिए बहुत से क्लिनिक खोले हैं। 
प्रीता कहती हैं कि आम लोगों की तरह ही हम बहनों में भी लड़ाईयां होती हैं लेकिन हम चारों में यह तय किया हुआ है कि हम अपनी लड़ाई को हमेशा सुलझा कर ही सोयेंगे। तो वहीं शोभना कहती हैं कि हम हमेशा एक दूसरे के इज्जत भी उतनी ही करते हैं। उन्होंने बताया कि हम सब लोगों का अलग- अलग काम है, तो जब भी हमें काम को लेकर तर्क करना होता है तो हम बैठ कर आराम से एक दूसरे से बातचीत करते हैं, और इसी तरह हम लोग अपने निजी काम भी करते हैं, घर में कोई भी कार्यक्रम हो तो हम सबको अपना काम करना होता है। 
शोभना ने एक इंटरव्यू में बताया कि वह आर्किटेक्ट बनना चाहती थीं और उनकी मां उनको और सभी बहनों को बहुत सपोर्ट करती थी, वह चाहती थी कि हम अपने पैरों पर खड़े हो। उन्होंने कहा कि हम चारों बहुत अच्छे दोस्त हैं और हमारा काम बढ़ रहा है क्योंकि हम एक टीम की तरह काम करते हैं और दूसरे के काम में बिल्कुल दखल नहीं देते हैं। उन्होंने अपनी रुचि के बारे में बताया कि उनको बॉलीवुड गाने सुनना बेहद पसंद हैं, उनको थोड़ा सा ड्रम्स भी बजाना आता है, इसके अलावा उनको और उनके पति को स्पोर्ट्स में बहुत रुचि है, वो कभी भी स्पोर्ट्स टूर्नामेंट और क्रिकेट व फुटबॉल मैच देखना नहीं भूलती।