गरीबी को अपनी ताकत बनाकर राष्ट्रीय पटल पर छा जाना कला ही तो है
गरीबी को अपनी ताकत बनाकर राष्ट्रीय पटल पर छा जाना कला ही तो है
गरीबी किसे कहते हैं ये तो सभी को पता होगा लेकिन अभाव में जीना और उसी कमजोरी को अपनी ताकत बनाकर राष्ट्रीय पटल पर छा जाने की कला कम ही लोगों को आती है। कुछ दशक पहले रेहड़ी पर फल बेचने वाला बच्चा संसद के गलियारों में सांसद की हैसियत से घूमेगा ये बात कहानियों से आगे की नहीं लगतीं। विनोद सोनकर नाम है उस शख्स का जिसने इस लगभग असंभव से दिखने वाले किस्से को सच कर दिखाया है।विनोद सोनकर का जन्म 18 फरवरी 1970 को इलाहाबाद के सदियापुर में हुआ था। उनके पिता अमरनाथ सोनकर ठेले पर फल बेचते थे और माता चम्पी देवी सोनकर गोबर के कंडे बनाकर आस-पास के घरों में बेचती थीं जिसमें पूरा परिवार साथ देता था। ऐसी मुश्किल परिस्थितियों में संघर्षों से आगे बढ़ कर विनोद ने इलाहाबाद के सीएवी इंटर कॉलेज से इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी की और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की डिग्री हासिल की। उनकी गरीबी का आलम ये था कि इलाहाबाद की प्रसिद्ध "पजावा रामलीला" के समय पेड़ों से गिरी इमली को बिन बिन कर बेचा करते थे। बचपन में उनके पथरी के ऑपरेशन के लिये पिता का ठेला भी बिक गया और माता ने दूसरों के घरों में बर्तन भी मांजे।
पढ़ाई खत्म होने के बाद विनोद सोनकर ने फलों का ही कारोबार शुरू किया। उनके दिल मे हमेशा अपने समाज के गरीब और वंचित लोगों के लिये वो सब कुछ करने की इच्छा हुई जिससे उनके जीवन में गरीबी के अंधेरे को समृद्धि के प्रकाश से बदल सकें। वे कई वर्षों तक अखिल भारतीय खटीक समाज से जुड़े रहे व लगातार कई वर्षों तक प्रदेश सचिव रहे। वे कई वर्षों से भारतीय जनता पार्टी से भी जुडे थे। वर्ष 2014 में जब भाजपा ने कौशांबी से चुनाव लड़ने के लिये स्वच्छ व ईमानदार छवि वाले दलित उम्मीदवार की तलाश शुरू की तो विनोद सोनकर पहली पसंद के तौर पर उभरे। पार्टी ने उन्हें चुनाव मैदान में उतारा तो जोरदार जीत मिली। उन्होंने कौशाम्बी लोकसभा क्षेत्र में विकास के कई कार्य करवाये जिनसे जनता ने उन्हें वर्ष 2019 के चुनाव में दोबारा चुनकर 17वीं लोकसभा में भेजा।
विनोद सोनकर को संसदीय मूल्यों में पूरी निष्ठा है और पहले दो सत्रों में उनकी उपस्थिति शत प्रतिशत रही है। उन्होंने 16 बहसों और 8 विशेष उल्लेख की चर्चाओं में सक्रिय भागीदारी की है। कुल 57 दिनों के दोनों सत्रों में उन्होंने 84 प्रश्न और एक पूरक प्रश्न पूछे हैं जो स्वास्थ्य, पर्यावरण, कृषि, ग्रामीण विकास और रोजगार आदि से संबंधित हैं। उन्होंने एक सरकारी और दो प्राइवेट बिल सदन में पेश किये हैं तथा एक प्राइवेट मेंबर रिजॉल्यूशन भी प्रस्तुत किया है। वे संसद की एथिक्स कमेटि के चेयरमैन हैं और जेनरल परपस कमेटि तथा पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस की स्टैंडिंग कमेटियों के सदस्य हैं।
विनोद सोनकर बेहद दयालु और धार्मिक प्रवृत्ति के व्यक्ति हैं और कहते हैं कि वे अपने पास आये किसी भी जरूरतमंद व्यक्ति को कभी खाली हाथ नहीं लौटाते।