मजबूत इरादों और लगन से बने लोकप्रिय जिलाधिकारी डी अमॉय कुमार
हरियाली और रोजगार दोनों के लिए मशहूर हैं
तेलंगाना के रंगारेड्डी जिले के जिलाधिकारी डी अमॉय कुमार शांत स्वभाव और गंभीर छवि के अधिकारी हैं। प्रशासनिक सेवा शुरू से उनकी पहली पसंद थी क्योंकि उनके जीवन में सेवा का अहम स्थान है। उन्होंने अपने साहसिक कदमों से जो लोकप्रियता हासिल की है वो कम ही अधिकारियों को प्राप्त है।
मध्यम वर्गीय परिवार के अमॉय कुमार का जन्म 17 नवंबर 1981 को हुआ। उनकी रुचि पठन पाठन में काफी रही है। 2007 में स्टेट ऐडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस में चुने गये। उनके लगन और जरूरतमंदों के उत्थान के लिए किए काम को देखते हुए मात्र छह वर्षों की सेवा के बाद वर्ष 2013 में उन्हें केंद्र की प्रशासनिक सेवा में प्रमोट कर दिया गया। तेलंगाना में रहते हुए डी अमॉय कुमार को सबसे पहले अंडर सेक्रेटरी एजुकेशन बनाया गया। इस दौरान उन्होंने काफी कम समय में शिक्षा के क्षेत्र में काफी सुधार किए। इसके बाद उनका तबादला रेवन्यू डिपार्टेमेंट में हुआ और इस कार्यकाल में उन्होंने तेलंगाना के लिए लैंड रेवन्यू के क्षेत्र में जबरदस्त कार्य किया। फिर वे कई जिलों के जिलाधिकारी रहे जिनमें जयशंकर भूपलपल्ली और भद्राद्री कोठागुडेम प्रमुख थे। दोनों ही जिलों में अपने बेहतरीन कार्यों के कारण उन्होंने खासी लोकप्रियता बटोरी।
दिसंबर 2018 में डी अमॉय कुमार को सूर्यापेट में कलेक्टर बनाया गया। उन्होंने इस जिले में वेलफेयर स्कीम और डेवलपमेंट प्रोग्राम को जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ाया और आम लोगों को इसका लाभ सीधे मिले इसे सुनिश्चित किया। सूर्यापेट जिले में उन्होंने लैंड रिकॉर्ड में जो सुधार करवाया वह तेलंगाना के दूसरे जिलों के लिए नजीर बना। जिले में ‘पल्ले प्रगति’ के कार्यों में तेजी लायी गयी। कई गांवों में खाली पड़ी जमीनों पर नर्सरी लगाये गये। इसके साथ ही पेड़ों की कटाई को रोकने और संक्षरण के लिए तेलंगाना सरकार ने ‘कू हरित हरम’ नाम से एक महत्वाकांक्षी योजना शुरू की । इस योजना को जिलाधिकारी डी अमॉय कुमार ने चुनौती के तौर पर लिया और जिले में पेड़ लगाने को प्रश्रय दिया। इससे ग्रामीण और शहरी इलाकों में हरियाली तो बढ़ी ही, आम लोगों को रोजगार भी मिला। ‘पल्ले प्रगति’ और ‘कू हरित हरम’ योजना के कार्यान्वयन में सूर्यापेट को तेलंगाना के सभी जिलों में पहला स्थान मिला। शिक्षा के क्षेत्र में भी सूर्यापेट में काफी सुधार हुआ। इस दौरान उन्होंने जिले में ग्राम पंचायत और उपचुनाव से लेकर लोकसभा तक के चुनाव कराये लेकिन स्थानीय चुनाव से ठीक पहले उनका ट्रांसफर रंगारेड्डी जिले में कर दिया गया।
जनवरी 2020 में रंगारेड्डी में बतौर जिलाधिकारी उन्होंने पदभार ग्रहण किया। यहां ज्वाइन करने के साथ पहले से जारी विकास कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाया और ग्रामीण इलाकों की योजनाओं में तेजी लायी गयी। जिले के ग्रामीण इलाकों में सैनिटेशन प्रोग्राम को बेहतर किया गया। रंगारेड्डी जिले में भी डी अमॉय कुमार ने अपनी प्रिय योजनाओं ‘पल्ले प्रगति’ और ‘कू हरित हरम’ पर जबरदस्त ढंग से कार्य किया क्योंकि इस क्षेत्र के लिए हरियाली ना होना बड़ी समस्या है। पेयजल संकट दूर करने के लिए भी जिले में जोर-शोर कार्य चल रहा है। गरीबों को मनरेगा योजना से जोड़ा जा रहा है। इन सब के बीच कोरोना के आ जाने से जिलाधिकारी डी अमॉय कुमार की जवाबदेही काफी बढ़ गयी है। तेलंगाना में कोरोना के संक्रमण को देखते हुए रंगारेड्डी जिले में विदेश से आने वाले हर शख्स पर स्थानीय प्रशासन की सख्त नजर है। बतौर जिलाधिकारी उन्होंने लोगों से अपील की है कि वे सतर्क रहें और घर से निकलने से बचें। इतना ही नहीं लॉकडाउन के दौरान जरूरी चीजों की कालाबाजारी और दामों में हुई बेतहाशा वृद्धि पर लगाम लगाने के लिए उन्होंने एक टास्क फोर्स गठित किया और शिकायत मिलने पर संकट के घड़ी में घोखाधड़ी, जमाखोरी करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की। क्वारंटाइन सेंटरों में तमाम चीजों की व्यवस्था की ताकि जरूरतमंदों को कोई दिक्कत ना हो। अपने मजबूत मनोबल से लोगों में विश्वास जगाने का कार्य किया है।
फेम इंडिया और एशिया पोस्ट द्वारा शानदार गवर्नेंस, दूरदर्शिता, उत्कृष्ट सोच, जवाबदेह कार्यशैली, अहम फैसले लेने की त्वरित क्षमता, गंभीरता और व्यवहार कुशलता आदि दस मानदंडों पर किये गए सर्वे में रंगारेड्डी के जिलाधिकारी डी अमॉय कुमार 'इरादे' श्रेणी में प्रमुख स्थान पर हैं।