संकट में भी हौसला रखने के माहिर जिलाधिकारी हैं शशांका कोंडुरू

आंध्र प्रदेश - तेलंगाना के टॉपर और देश भर में 16वीं रैंकिंग हासिल कर बने हैं आईएएस

संकट में भी हौसला रखने के माहिर जिलाधिकारी हैं शशांका कोंडुरू

प्रशासनिक सेवा को जरूरतमंदों की सेवा का जरिया मानने वाले शशांका कोंडुरु करीमनगर के लोकप्रिय जिलाधिकारी हैं। उन्हें विकासवादी सोच का ऑफिसर माना जाता है और सरकारी स्कीमों के सफल इंप्लिमेंटेशन के कारण प्रदेश सरकार और वरिष्ठ अधिकारियों का भी भरोसा हासिल है।

हैदराबाद में 25 मई 1985 को जन्मे शशांका कोंडुरु के पिता के.वेंकटैया आईडीपीएल में सुपरवाइजर और माता एम संयुक्ता गृहिणी रही हैं। उनका परिवार नालगोंडा के पैतृक गांव पेड्डा पाजिसाला को छोड़कर हैदराबाद आ गया था। पढ़ाई हैदराबाद में हुई। उन्होंने सेंट अन्ना कॉलेज से  बीए साइकोलॉजी और एमए हैदराबाद यूनिवर्सिटी से करने के बाद एसवी यूनिवर्सिटी तिरुपति से पीएचडी भी की। चार्टर्ड अकाउंटेंसी करने के बाद बतौर चार्टर्ड अकाउंटेंट प्रैक्टिस भी शुरू की, लेकिन फिर प्रशासनिक सेवा में जाने का फैसला किया। उन्होंने वर्ष 2012 में यूपीएससी की परीक्षा दी तो प्रिलिम्स भी क्वालिफाई नहीं कर पाये, लेकिन हिम्मत नहीं हारी। अगले साल जब पूरी तैयारी से मैदान में उतरे तो देश भर में16 वीं और आंध्र प्रदेश के प्रथम रैंक हासिल कर आंध्रप्रदेश कैडर लिया।  

ट्रेनिंग के बाद उन्हें  दिसंबर 2014 में करीमनगर के जगतियल ताल्लुके का सब-कलेक्टर बनाया गया। इसके बाद कुछ महीने केंद्र सरकार में मिनिस्ट्री ऑफ कल्चर में भी रहे।  दिसंबर 2016 में उन्हें  करीमनगर म्युनिसिपल कॉरपोरेशन का कमिश्नर बनाया गया जहां वे करीब 22 महीने रहे। कॉरपोरेशन के तमाम व्यवस्था को दुरुस्त किया और लोगों के लिए बुनियादी सुविधाओं को प्राथमिकता के साथ लागू किया। 

सितंबर 2018 में शशांका को जिला जोगुलांबा-गडवाल का कलेक्टर बनाया गया जहां उन्होंने बच्चों को बेहतर शिक्षा दिलाने के लिए नयी पहल की। वे खुद स्कूलों में क्लास लेने गये और दसवीं के छात्रों के लिए ‘भविता’ नाम से सोशल स्टडीज में सतत, विकास और समानता की पढ़ाई शुरू करवायी। ये प्रोग्राम केटी डोडी मॉडल में शुरू की गयी। इतना ही नहीं छात्रों को क्वालिटी एजुकेशन के साथ क्वालिटी डायट भी मिले इसकी व्यवस्था भी करवायी। आम लोगों को बेहतर हेल्थ सर्विस मिले उसके लिए भी सरकारी योजनाओं को आगे बढ़ाया। 

उनकी उत्कृष्ट कार्यशैली  को देखते हुए शशांका कोंडुरू दिसंबर 2019 में करीमनगर का जिलाधिकारी बनाया गया। वे पहले भी विभिन्न पदों पर करीमनगर में रह कर सफल पारी खेल चुके थे इसलिये कलेक्टर बनने पर लोगों ने उनका पुरजोर स्वागत किया। पदभार संभालने के साथ ही उन्होंने करीमनगर में आम लोगों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने के साथ-साथ पेयजल और शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया। 

इस बीच कोरोना आ धमका और इस वैश्विक महामारी से बचाने के लिए उन्होंने सरकारी गाइडलाइंस पर जोर दिया। करीमनगर में तबलीगी जमात के इंडोनेशियाई नागरिक से कोरोना सक्रंमण की शुरुआत हुई, लेकिन शशांका कोंडुरू ने  केंद्र और बफर इलाकों की निशानदेही कर रैपिड हेल्थ सर्वे तथा साफ-सफाई के विशेष अभियान शुरुआत करवायी। करीमनगर शहर में घर -घर जाकर सर्वे किया गया। वे समाज के बड़े लोगों तक पहुंचे और उन्हें सरकार की गाइडलाइंस को पालन करने के लिए प्रोत्साहित किया। उनके नेतृत्व में करीमनगर जिले में  कोविड रोकथाम की कोशिश जारी है।

फेम इंडिया और एशिया पोस्ट द्वारा  शानदार गवर्नेंस, दूरदर्शिता, उत्कृष्ट सोच, जवाबदेह कार्यशैली, अहम फैसले लेने की त्वरित क्षमता, गंभीरता और व्यवहार कुशलता आदि दस मानदंडों पर किये गये सर्वे में करीमनगर के जिलाधिकारी  शशांका कोंडुरु  'माहिर' श्रेणी में प्रमुख स्थान पर हैं।