नवाचार, संवेदनशील प्रशासन और समावेशी विकास के प्रतीक : अंकित कुमार सिंह

डूंगरपुर, राजस्थान में बहायी विकास की नई बहार

नवाचार, संवेदनशील प्रशासन और समावेशी विकास के प्रतीक : अंकित कुमार सिंह

आईएएस अधिकारी अंकित कुमार सिंह राजस्थान कैडर के 2014 बैच के उन चुनिंदा अधिकारियों में शामिल हैं जिन्होंने अपने कार्यों से प्रशासनिक सेवा को नई पहचान दी है। वर्तमान में वे राजस्थान के डूंगरपुर जिले के जिला कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट के रूप में कार्यरत हैं। अपनी दूरदर्शी सोच, जनकेंद्रित कार्यशैली और नवाचार आधारित प्रशासन के कारण वे देशभर में एक प्रेरणादायक प्रशासक के रूप में पहचाने जाते हैं। विशेष रूप से दिव्यांगजन सशक्तिकरण, रोजगार सृजन, जल संरक्षण और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में उनके प्रयासों ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठा दिलाई है। 
अंकित कुमार सिंह मूल रूप से उत्तर प्रदेश से संबंध रखते हैं। उन्होंने इंजीनियरिंग की शिक्षा प्राप्त की और इलेक्ट्रॉनिक्स में बी.टेक. किया। इसके बाद उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा उत्तीर्ण कर भारतीय प्रशासनिक सेवा में प्रवेश किया। वर्ष 2014 बैच के राजस्थान कैडर के अधिकारी के रूप में उन्होंने प्रशासनिक जीवन की शुरुआत की। यूपीएससी के माध्यम से डायरेक्ट रिक्रूट अधिकारी के रूप में चयनित अंकित कुमार सिंह ने अपने शुरुआती कार्यकाल से ही मेहनती, संवेदनशील और परिणामोन्मुख अधिकारी की छवि बनाई।
प्रशासनिक सेवा में लगभग 12 वर्षों के अनुभव के दौरान उन्होंने राजस्थान के विभिन्न जिलों में कार्य किया और हर स्थान पर अपनी अलग पहचान छोड़ी। अब तक वे 10 अलग-अलग पदों और स्थानों पर सेवाएं दे चुके हैं। उनकी सबसे खास विशेषता यह रही कि जहां भी वे जिला कलेक्टर बनकर गए, वहां उन्होंने नवाचार आधारित योजनाओं के माध्यम से ऐसा कार्य किया जिसे राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया। वे उन चुनिंदा अधिकारियों में हैं जिन्होंने तीन अलग-अलग जिलों में कार्य करते हुए तीन राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त किए।
अंकित कुमार सिंह को राष्ट्रीय स्तर पर सबसे बड़ी पहचान डूंगरपुर जिले में दिव्यांगजन सशक्तिकरण के क्षेत्र में किए गए कार्यों से मिली। वर्ष 2024 में अंतरराष्ट्रीय दिव्यांगजन दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें “राष्ट्रीय दिव्यांगजन सशक्तिकरण पुरस्कार” से सम्मानित किया। 
डूंगरपुर में जिला कलेक्टर के रूप में उन्होंने “मिशन – नो वन लेफ्ट बिहाइंड” अभियान शुरू किया। इस मिशन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि जिले का कोई भी दिव्यांग व्यक्ति सरकारी योजनाओं से वंचित न रहे। इस अभियान के तहत जिले के सभी 10 ब्लॉकों में विशेष शिविर आयोजित किए गए, जहां दिव्यांगजनों को प्रमाण पत्र, सरकारी योजनाओं की जानकारी और सहायता उपलब्ध कराई गई। उन्होंने राशन वितरण व्यवस्था को भी अधिक मानवीय बनाते हुए घर-घर राशन पहुंचाने की व्यवस्था सुनिश्चित कराई। यह पहल उन दिव्यांग व्यक्तियों के लिए अत्यंत लाभकारी साबित हुई जो शारीरिक असमर्थता के कारण सार्वजनिक वितरण प्रणाली तक पहुंचने में कठिनाई महसूस करते थे।
अंकित कुमार सिंह ने दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी उल्लेखनीय कार्य किया। उन्होंने राजीविका के माध्यम से 228 स्वयं सहायता समूहों का गठन कराया, जिनमें दिव्यांग जन शामिल थे। इन समूहों के माध्यम से रोजगार, स्वरोजगार और आर्थिक सहायता के अवसर उपलब्ध कराए गए। इससे अनेक दिव्यांग व्यक्तियों को आर्थिक रूप से मजबूत बनने में सहायता मिली। प्रशासनिक दृष्टि से यह पहल सामाजिक समावेशन का उत्कृष्ट उदाहरण मानी गई।
मनरेगा योजना के अंतर्गत भी उनके प्रयास उल्लेखनीय रहे। उन्होंने सुनिश्चित किया कि अधिक से अधिक दिव्यांगजन महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना से जुड़ें। उनके प्रयासों के परिणामस्वरूप 6,895 दिव्यांगजन योजना में पंजीकृत हुए, जो राजस्थान में सबसे अधिक संख्या थी। इतना ही नहीं, उनके नेतृत्व में दिव्यांगजनों के लिए दो लाख से अधिक मानव दिवस का रोजगार सृजित किया गया। इस कार्य के माध्यम से लगभग 4.25 करोड़ रुपये की मजदूरी का भुगतान किया गया, जो राज्य में सर्वोच्च स्तर पर दर्ज किया गया। यह उपलब्धि दर्शाती है कि वे केवल योजनाओं की घोषणा तक सीमित नहीं रहते, बल्कि उन्हें धरातल पर प्रभावी ढंग से लागू भी करते हैं।
मतदाता जागरूकता के क्षेत्र में भी उन्होंने सराहनीय कार्य किया। उन्होंने यह सुनिश्चित करने के लिए विशेष अभियान चलाया कि दिव्यांग मतदाता शत-प्रतिशत मतदान करें। प्रशासनिक मशीनरी को संवेदनशील बनाकर उन्होंने मतदान केंद्रों पर सुविधाएं उपलब्ध कराईं और दिव्यांग मतदाताओं के लिए सुगम वातावरण तैयार किया। यह पहल लोकतांत्रिक भागीदारी को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी गई।
डूंगरपुर से पहले वे बांसवाड़ा जिले में जिला कलेक्टर रहे, जहां जल संरक्षण के क्षेत्र में किए गए नवाचारों के लिए उन्हें राष्ट्रीय जल पुरस्कार प्राप्त हुआ। उन्होंने जल संसाधनों के संरक्षण, वर्षा जल संचयन और ग्रामीण क्षेत्रों में जल उपलब्धता बढ़ाने के लिए कई प्रभावी पहल कीं। इन प्रयासों ने न केवल जल संकट कम करने में मदद की बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान की। इसके बाद करौली जिले में जिला कलेक्टर रहते हुए उन्होंने सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए उल्लेखनीय कार्य किए, जिसके लिए उन्हें राष्ट्रीय एमएसएमई पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
अंकित कुमार सिंह की प्रशासनिक कार्यशैली पारदर्शिता, नवाचार और जवाबदेही पर आधारित मानी जाती है। वे नियमित फील्ड विजिट, समीक्षा बैठकें और जनसुनवाई के माध्यम से योजनाओं की निगरानी करते हैं। वे मानते हैं कि प्रशासन का वास्तविक उद्देश्य आम लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाना है। तकनीकी पृष्ठभूमि होने के कारण वे डिजिटल मॉनिटरिंग और डेटा आधारित प्रशासनिक निर्णयों को प्राथमिकता देते हैं। इससे योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और गति दोनों बढ़ती हैं।
उनकी व्यक्तिगत जिंदगी भी प्रशासनिक सेवा के प्रति समर्पण का उदाहरण है। उनकी पत्नी अंजलि राजोरिया भी 2015 बैच की आईएएस अधिकारी हैं और वर्तमान में प्रतापगढ़ जिले की कलेक्टर हैं। दोनों अधिकारी राजस्थान प्रशासनिक सेवा में एक प्रेरणादायक दंपति के रूप में देखे जाते हैं।
अंकित कुमार सिंह की यात्रा यह सिद्ध करती है कि संवेदनशीलता, नवाचार और ईमानदार नेतृत्व के माध्यम से प्रशासनिक सेवा को जनसेवा का सशक्त माध्यम बनाया जा सकता है। वे केवल योजनाओं के क्रियान्वयन तक सीमित अधिकारी नहीं हैं, बल्कि समाज के कमजोर वर्गों को मुख्यधारा से जोड़ने वाले दूरदर्शी प्रशासक हैं। उनके कार्य यह संदेश देते हैं कि यदि प्रशासनिक इच्छाशक्ति मजबूत हो तो सरकारी योजनाएं वास्तव में लोगों के जीवन में बदलाव ला सकती हैं। राजस्थान ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए वे एक प्रेरणादायक प्रशासनिक व्यक्तित्व के रूप में उभर चुके हैं।