नारी शक्तियों के लिए प्रेरणास्रोत आईपीएस - आर श्रीलेखा

आर श्रीलेखा देश के खूबसूरत राज्य केरल की पहली महिला आईपीएस अधिकारी हैं

नारी शक्तियों के लिए प्रेरणास्रोत आईपीएस  - आर श्रीलेखा

आर श्रीलेखा देश के  खूबसूरत राज्य केरल की पहली महिला आईपीएस अधिकारी तो हैं ही, उन्हें प्रशासनिक सुधार में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिये भी जाना जाता है। उन्हें देश के सबसे तेज-तर्रार पुलिस अधिकारियों में एक है। सीबीआई में पोस्टिंग के दौरान वे 'रैड श्रीलेखा' के नाम से भी विख्यात रही हैं। वर्तमान में वे केरल सरकार में डीजी है। उनके उपर मोटर ट्रांसपोर्ट विभाग के प्रमुख और मोटर ट्रांसपोर्ट फाइनैंशियल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन की सीईओ भी जिम्मेदारी हैं। 25 दिसंबर 1960 को तिरुवनंतपुरम में जन्मीं आर. श्रीलेखा प्रो. एन. वेलयुधन नायर और बी राधम्मा की तीसरी संतान हैं। कॉटन हिल गवर्नमेंट गर्ल्स स्कूल में स्कूली शिक्षा के बाद, वर्ष 1981 में इंगलिश लिटरेचर में ग्रैजुएशन में उन्होंने पूरे केरल युनिवर्सिटी में दूसरी रैंक हासिल की। 1983 में डिस्टिंक्शन के साथ एमए करने के बाद वे तिरुवनंतपुरम के विद्याधिराज पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज में लेक्चरार भी बनीं। वर्ष 1985 में वे रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की अधिकारी चुनी गयीं और मुंबई में तैनात हुईं। आर. श्रीलेखा वर्ष 1987 बैच में सिविल सर्विसेज की परिक्षा पास कर केरल कैडर की पहली महिला आईपीएस बनी। पहली पोस्टिंग बतौर एएसपी चेरथला और त्रिशूर में हुई। वे त्रिशूर सहित अलप्पुझा व पठानमथिटा जिलों में बतौर एसपी नियुक्त की गई। उन्हें इमानदार और कर्मठ आईपीएस अफसर माना जाता हैै। एसपी और डीआईजी के रूप में वे एंटी करप्शन ब्यूरो और डीआईजी और आईजी रेंज के रूप में एर्नाकुलम रेंज में तैनात रहीं। केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर सीबीआई में वे बतौर एआईजी कोच्चि और नयी दिल्ली में तैनात रहीं और कई महत्त्वपूर्ण मामलों को सॉल्व किया।  उन्होंने प्रतिनियुक्ति पर रबर मार्केटिंग कॉर्पोरेशन, स्टेट कंस्ट्रक्शन कॉर्पोरेशन और रोड्स एंड ब्रिजेज डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन जैसे तीन सार्वजनिक उपक्रमों का कार्यभार भी संभाला।  बतौर ट्रांसपोर्ट कमिश्नर आर. श्रीलेखा ने राज्य के 98 लाख मोटरगाड़ियों की वास्तविक स्थिति जानने के लिये मोबाइल ऐप स्मार्ट ट्रेस लाँच किया, जो बेहद सफल और चर्चित हुआ। उनके कार्यकाल में परिवहन विभाग ने 3000 करोड़ का राजस्व वसूला, जो एक रिकॉर्ड था। आर. श्रीलेखा एडीजी के तौर पर आर्म्ड पुलिस बटालियन, विजिलेंस, एंटी करप्शन ब्यूरो , क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो और इंटेलिजेंस में भी एडीजी के रूप में कार्य किया। सितंबर 2018 में, वे डीजी बनीं और केरल की महानिदेशक, कारागार और सुधार सेवाएं के तौर पर नियुक्त हुईं। जून 2019 से, वे केरल के ट्रांसपोर्ट विभाग की महानिदेशक का कमान संभाल रही हैं। अपने करियर में आर श्रीलेखा को कई अवॉर्ड व सम्मान मिले हैं ,जो संवेदनशील आपराधिक मामलों, आर्थिक अपराधों, बच्चों और महिलाओं की तस्करी, मनी लॉन्ड्रिंग और ड्रग ट्रैफिकिंग जैसे संवेदनशील अपराधों का पता लगाने के लिये विभाग और सरकार द्वारा प्रदान किये गये हैं। उन्होंने संकट में फंसी महिलाओं की मदद के लिये 'थुना' और पुलिसकर्मियों को तनाव से बचाने के लिये 'हैट्स' नामक पोर्टल लाँच करवाई । वर्ष 2001 में श्रीलेखा ने वूमेन ट्रैफिकिंग की रोकथाम के लिए यूएन ड्राफ्ट प्रोटोकॉल में भारत का प्रतिनिधित्व किया और वर्ष 2005 में ल्योन, फ्रांस में इंटरपोल से ट्रेनिंग ली। इसके अलावा, उन्होंने 2014 में स्कॉटलैंड यार्ड के साथ प्रशिक्षण लिया। 2015 में, शेवनिंग फैलोशिप पा कर किंग्स कॉलेज, लंदन से डिग्री प्राप्त की है। आर श्रीलेखा ने मेधावी सेवाओं और विशिष्ट सेवाओं के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक प्राप्त करने के अलावे केरल सरकार मेधावी सेवा एंट्री, इंदिरा गांधी अवॉर्ड और मुख्यमंत्री से ब्रेव हार्ट अवॉर्ड भी प्राप्त किया हैं। वे एक उम्दा लेखिका हैं और मलयालम में अब तक 9 किताबें लिख चुकी हैं। वर्ष 2008 में उन्हें साहित्य का फोकाना पुरस्कार भी मिल चुका है। 

 फेम इंडिया मैगजीन-एशिया पोस्ट सर्वे के 12 मापदंडों पर किये गये "25 उत्कृष्ट आईपीएस 2020" के वार्षिक सर्वे में आर श्रीलेखा, "शक्ति" श्रेणी में प्रमुख स्थान पर हैं।