एक समर्पित प्रशासक, ईमानदार अफसर और विकास का प्रतीक : वैभव श्रीवास्तव:
सारण में प्रशासनिक सुधार और डिजिटल क्रांति के प्रणेता
आईएएस अधिकारी वैभव श्रीवास्तव बिहार कैडर के 2018 बैच के उन प्रतिभाशाली अधिकारियों में गिने जाते हैं जिन्होंने कम समय में अपनी अलग पहचान बनाई है। वर्तमान में वे सारण जिले के जिलाधिकारी के रूप में कार्यरत हैं और अपनी पारदर्शी कार्यशैली, प्रशासनिक दक्षता तथा जनकेंद्रित सोच के कारण लगातार चर्चा में हैं। प्रशासनिक निर्णयों में स्पष्टता, योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और जनता से सीधा संवाद उनकी पहचान बन चुका है। उनके नेतृत्व में सारण जिले में विकास, जवाबदेही और प्रशासनिक सक्रियता को नई दिशा मिली है।
वैभव श्रीवास्तव का जन्म 16 दिसंबर 1989 को उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के गोला नगर में हुआ। उनके पिता दीपक श्रीवास्तव और माता निधि श्रीवास्तव ने बचपन से ही उन्हें अनुशासन, शिक्षा और सामाजिक जिम्मेदारी के संस्कार दिए। पढ़ाई के दौरान वे हमेशा मेधावी छात्र रहे और विज्ञान तथा तकनीक में विशेष रुचि रखते थे। बाद में उन्होंने सूरत से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक की डिग्री प्राप्त की। इंजीनियरिंग शिक्षा ने उनमें तार्किक सोच, समस्या समाधान क्षमता और तकनीकी दृष्टिकोण विकसित किया, जिसका लाभ उन्हें प्रशासनिक सेवा में भी मिला।
इंजीनियरिंग के बाद उन्होंने कॉर्पोरेट क्षेत्र में कार्य किया, लेकिन उनका लक्ष्य हमेशा लोकसेवा था। उन्होंने यूपीएससी परीक्षा की तैयारी पूरी गंभीरता के साथ शुरू की। वर्ष 2017 की सिविल सेवा परीक्षा में उन्होंने अखिल भारतीय स्तर पर 98वीं रैंक प्राप्त की। इसके साथ ही भारतीय वन सेवा परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक एक हासिल करना उनकी असाधारण प्रतिभा का प्रमाण था।
बिहार कैडर मिलने के बाद उन्होंने विभिन्न प्रशासनिक जिम्मेदारियों को पूरी निष्ठा से निभाया। नालंदा जिले में डेवलपमेंट डिप्टी कमिश्नर के रूप में उन्होंने सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में गति लाई। उन्होंने ग्रामीण विकास योजनाओं की निगरानी मजबूत की और कई प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने का प्रयास किया। उनके कार्यकाल में योजनाओं की नियमित समीक्षा, फील्ड निरीक्षण और समयबद्ध कार्य संस्कृति पर विशेष जोर दिया गया। इससे प्रशासनिक दक्षता बढ़ी और आम लोगों को योजनाओं का लाभ अधिक प्रभावी तरीके से मिलने लगा। उन्होंने कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को सुव्यवस्थित किया, प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाया और नवाचार के माध्यम से दक्षता बढ़ाई। उनकी कार्यशैली ने उन्हें कुशल और नवोन्मेषी प्रशासक के रूप में पहचान दिलाई।
सितंबर 2024 में उन्हें बिहार सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग का निदेशक बनाया गया। इस जिम्मेदारी में उन्होंने सरकार और जनता के बीच संवाद को मजबूत करने की दिशा में कई महत्वपूर्ण पहल कीं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने बिहार पत्रकार बीमा योजना में सुधार कर प्रीमियम कम कराया और आवेदन की समय सीमा बढ़ाने जैसे कदम उठाए। उन्होंने सरकारी योजनाओं की जानकारी आम लोगों तक पहुंचाने के लिए आधुनिक संचार माध्यमों और डिजिटल प्लेटफॉर्म के उपयोग पर भी जोर दिया।
10 दिसंबर 2025 को वैभव श्रीवास्तव ने सारण जिले के जिलाधिकारी के रूप में कार्यभार संभाला। सारण बिहार का ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण जिला है, जहां जलजमाव, ट्रैफिक, आधारभूत संरचना और शहरी प्रबंधन जैसी कई चुनौतियां लंबे समय से मौजूद रही हैं। पदभार संभालते ही उन्होंने विकास कार्यों की समीक्षा शुरू की और अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि योजनाओं में लापरवाही या देरी किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं होगी। उन्होंने सभी प्रखंडों में चल रही योजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग और जवाबदेही सुनिश्चित करने पर बल दिया।
सारण में जलजमाव की समस्या को उन्होंने प्राथमिकता के साथ उठाया। खनुआ नाला परियोजना को समय पर पूरा कराने के लिए उन्होंने संबंधित विभागों को निर्देश दिए। नाले की सफाई, अतिक्रमण हटाने और जल निकासी व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए अभियान चलाए गए। प्रशासनिक स्तर पर इन प्रयासों का उद्देश्य बरसात के दौरान लोगों को राहत देना और शहरी व्यवस्था को बेहतर बनाना था। मीडिया रिपोर्टों में इन पहलों को सारण के लिए महत्वपूर्ण कदम माना गया।
सड़क और आधारभूत संरचना विकास के क्षेत्र में भी उन्होंने तेजी से काम आगे बढ़ाने पर जोर दिया। राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण और चौड़ीकरण कार्यों की नियमित समीक्षा की गई। उनका मानना है कि बेहतर सड़क नेटवर्क व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य और निवेश को बढ़ावा देता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि निर्माण कार्य गुणवत्ता और समय सीमा दोनों का पालन करते हुए पूरे किए जाएं। डबल डेकर पुल सहित कई इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं पर भी प्रशासनिक स्तर पर सक्रियता दिखाई गई।
यातायात व्यवस्था सुधारना भी उनकी प्राथमिकताओं में शामिल रहा। छपरा शहर में जाम की समस्या को देखते हुए उन्होंने ट्रैफिक नियंत्रण, पार्किंग व्यवस्था और सड़क अतिक्रमण हटाने पर विशेष ध्यान दिया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों के साथ कई समीक्षा बैठकें कीं और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में बेहतर प्रबंधन की रणनीति तैयार कराई। आम नागरिकों को सुगम यातायात उपलब्ध कराने की दिशा में यह प्रयास महत्वपूर्ण माना गया।
वैभव श्रीवास्तव की कार्यशैली का सबसे मजबूत पक्ष जनता से सीधा संवाद है। वे नियमित जनसुनवाई करते हैं और लोगों की समस्याओं को गंभीरता से सुनते हैं। फील्ड विजिट के दौरान वे योजनाओं की वास्तविक स्थिति का निरीक्षण करते हैं और अधिकारियों को तुरंत कार्रवाई के निर्देश देते हैं। यही कारण है कि लोग उन्हें संवेदनशील और सक्रिय प्रशासक के रूप में देखते हैं। उनकी प्रशासनिक शैली में पारदर्शिता, जवाबदेही और टीमवर्क स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।
वे डिजिटल प्रशासन और तकनीकी समाधानों के समर्थक माने जाते हैं। इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि होने के कारण वे परियोजनाओं की निगरानी में तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देते हैं। वे मानते हैं कि डिजिटल टूल्स और पारदर्शी व्यवस्था से भ्रष्टाचार कम होता है तथा योजनाओं का लाभ तेजी से जनता तक पहुंचता है। प्रशासनिक पारदर्शिता, आरटीआई व्यवस्था को मजबूत करना और जवाबदेह शासन उनकी कार्यशैली के प्रमुख आधार हैं।
वैभव श्रीवास्तव केवल एक कुशल प्रशासक ही नहीं बल्कि प्रेरणादायक व्यक्तित्व भी हैं। उन्हें यात्रा और फोटोग्राफी का शौक है तथा वे युवाओं को निरंतर सीखने और मेहनत करने के लिए प्रेरित करते हैं। उनकी सफलता की कहानी बताती है कि ईमानदारी, अनुशासन और दूरदर्शिता के साथ कोई भी व्यक्ति समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकता है। वैभव श्रीवास्तव जैसे अधिकारी भारतीय प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत बनाते हैं और विकास की नई संभावनाओं को वास्तविकता में बदलने का कार्य करते हैं। वे सकारात्मक और समाधानमुखी प्रशासनिक दृष्टिकोण अपनाते हैं।