संघर्ष, साधना और सेवा की असाधारण प्रशासनिक यात्रा : विशाल मिश्रा

रुद्रप्रयाग, उत्तराखंड को दिलायी देशभर में एक अलग पहचान

संघर्ष, साधना और सेवा की असाधारण प्रशासनिक यात्रा : विशाल मिश्रा

उत्तराखंड कैडर के आईएएस अधिकारी विशाल मिश्र उन प्रशासकों में से हैं जिनकी कहानी केवल एक सफल अधिकारी की नहीं, बल्कि एक ऐसे इंसान की है जिसने सीमित साधनों, कठिन परिस्थितियों और निरंतर असफलताओं को अपनी ताकत बनाया। उत्तर प्रदेश के कानपुर में जन्मे और अपनी प्रारंभिक शिक्षा फर्रुखाबाद जिले के फतेहगढ़ में पाने वाले विशाल की जीवन यात्रा यह सिद्ध करती है कि दृढ़ संकल्प और परिश्रम से हर लक्ष्य संभव है।

विशाल का बचपन उनके पिता हरि प्रसाद मिश्र के साथ फतेहगढ़ में बीता, जो वहाँ राजकीय इंटर कॉलेज में अंग्रेजी के प्रवक्ता थे। सरस्वती बाल विद्या मंदिर फतेहगढ़ से प्रारंभिक शिक्षा लेने के बाद पिता के कानपुर स्थानांतरण पर उनकी स्कूली शिक्षा वहाँ जारी हुई। दसवीं बोर्ड परीक्षा में उन्होंने उत्तर प्रदेश बोर्ड से सत्तहत्तर प्रतिशत अंक प्राप्त किए और इसके बाद बीएनएसडी शिक्षा निकेतन इंटर कॉलेज में प्रवेश लिया। वहाँ उन्होंने हिंदी माध्यम में पढ़ाई करते हुए अंग्रेजी माध्यम की पाठ्य पुस्तकों से अपनी तैयारी की — और इस दृढ़निश्चय ने उन्हें बारहवीं में पचासी प्रतिशत अंक दिलाए। यह उनके चरित्र का वह पहलू है जो आगे भी बार-बार सामने आता है — कठिन रास्ता चुनना और उसे पूरे मनोयोग से पूरा करना।

इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा की तैयारी के लिए विशाल कोटा- राजस्थान गए, किंतु नई जलवायु में उनका स्वास्थ्य बिगड़ने लगा। माता-पिता ने उन्हें वापस बुलाया, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। वे डटे रहे और उत्तर प्रदेश राज्य तकनीकी प्रवेश परीक्षा में राज्य के सर्वश्रेष्ठ इंजीनियरिंग कॉलेज हरकोर्ट बटलर प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कानपुर में सिविल इंजीनियरिंग में प्रवेश पाया। वर्ष 2012 में उन्होंने पचासी प्रतिशत अंकों के साथ यह डिग्री पूरी की। इसके बाद उन्होंने स्नातकोत्तर प्रवेश परीक्षा में आईआईटी कानपुर में जल संसाधन और हाइड्रॉलिक्स में एम टेक में प्रवेश लिया। वर्ष 2014 में उन्होंने साढ़े नौ के सीजीपीए के साथ यह डिग्री पूरी की — और इसी शोध काल में उन्हें यह अनुभव हुआ कि उनके भीतर लंबे समय तक एकाग्र होकर काम करने की अद्भुत क्षमता है। यहीं से यूपीएससी की तैयारी का विचार अंकुरित हुआ।

संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा उनके लिए भी एक चुनौतीपूर्ण यात्रा रही। पहले प्रयास में वर्ष 2015 में उन्होंने प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा दोनों उत्तीर्ण कर साक्षात्कार तक का सफर तय किया, किंतु फाइनल लिस्ट में उनका नाम नहीं आया। दूसरे प्रयास में वर्ष 2016 में भी यही हुआ — कुछ अंकों की कमी फिर आड़े आ गई। हालांकि निराशा हुई, लेकिन विशाल ने हार नहीं मानी। तीसरे प्रयास में उन्होंने समाजशास्त्र को वैकल्पिक विषय के रूप में रखते हुए वर्ष 2017 की सिविल सेवा परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक उनचास प्राप्त की और भारतीय प्रशासनिक सेवा में चुने गए। यह तीन प्रयासों की कहानी केवल व्यक्तिगत सफलता की नहीं, उस अदम्य जिजीविषा की कहानी है जो उनके पूरे जीवन का मूल स्वर है।

सेवा में आने के बाद विशाल मिश्र ने लगातार विविध और चुनौतीपूर्ण पदों पर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। प्रारंभिक प्रशिक्षण काल में अल्मोड़ा और उधम सिंह नगर में जमीनी प्रशासन सीखने के दौरान उनका जुड़ाव कोसी नदी पुनरुज्जीवन परियोजना से रहा — एक सफल जल संरक्षण प्रयोग जो उत्तराखंड हिमालय में नदी को नया जीवन देने का प्रयास था। इंजीनियरिंग की पृष्ठभूमि होने के कारण जल संसाधन, शहरी विकास और ग्रामीण अवसंरचना जैसे क्षेत्रों में उनकी समझ और दृष्टि गहरी रही।

रुद्रपुर में उप-मंडल मजिस्ट्रेट के रूप में कार्य करने के बाद वे रुद्रपुर नगर निगम के नगर आयुक्त बने। इसके बाद उन्हें उधम सिंह नगर का मुख्य विकास अधिकारी और साथ ही रुद्रपुर नगर निगम का आयुक्त — दोनों उत्तरदायित्व एक साथ सौंपे गए। यह दोहरी जिम्मेदारी उनकी प्रशासनिक क्षमता और विश्वसनीयता का प्रमाण थी। इसके बाद हल्द्वानी नगर निगम के नगर आयुक्त के रूप में उन्होंने शहरी शासन और नागरिक सेवाओं को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

वर्ष 2024 के अंत में उन्हें गढ़वाल मंडल विकास निगम का प्रबंध निदेशक और जल जीवन मिशन का मिशन निदेशक नियुक्त किया गया। इसके साथ ही जून 2025 में उन्हें नमामि गंगे परियोजना का परियोजना निदेशक भी बनाया गया। ये तीनों उत्तरदायित्व एक साथ सँभालना उनकी असाधारण कार्यक्षमता और समर्पण को दर्शाता है। जल जीवन मिशन के तहत ग्रामीण क्षेत्रों तक स्वच्छ पेयजल पहुँचाने और नमामि गंगे के तहत गंगा की अविरलता और निर्मलता सुनिश्चित करने जैसे राष्ट्रीय महत्व के कार्यों में उनका योगदान उनकी इंजीनियरिंग दृष्टि और प्रशासनिक कुशलता के संगम का जीवंत उदाहरण है।

विशाल मिश्रा ने जल क्षेत्र में नीतिगत सुधारों एवं प्रभावी जल प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने नमामि गंगे कार्यक्रम के अंतर्गत शोधित जल के सुरक्षित पुनः उपयोग संबंधी नीति के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके अतिरिक्त, उन्होंने जल जीवन मिशन के अंतर्गत संचालन एवं मेंटेनेंस नीति के निर्माण में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया, जिससे ग्रामीण पेयजल योजनाओं के दीर्घकालिक एवं सतत संचालन को सुनिश्चित करने में सहायता मिली।

फरवरी 2026 में उन्हें रुद्रप्रयाग का जिलाधिकारी नियुक्त किया गया — एक ऐसा जिला जो केदारनाथ और बदरीनाथ धाम जैसे देश के सर्वाधिक महत्वपूर्ण तीर्थस्थलों का प्रवेशद्वार है। यहाँ उन्होंने तुरंत ही केदारनाथ धाम यात्रा की हेलीपैड सुरक्षा व्यवस्था का विस्तृत निरीक्षण किया, अग्नि सुरक्षा मानकों की समीक्षा की और हेलीसेवाओं के लिए उड़ानों की संख्या सीमित कर यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की। इसके साथ ही हेलीपैड पर स्वयं सहायता समूहों के लिए विक्रय केंद्र स्थापित कर उन्होंने स्थानीय महिलाओं और समुदायों की आजीविका को तीर्थाटन से जोड़ने का सराहनीय प्रयास किया।

विशाल मिश्र की इस यात्रा में उनके परिवार की भूमिका अविभाज्य है। उनके बड़े भाई ने उनकी तैयारी के वर्षों में उनका मार्गदर्शन किया और जीवनयापन का सहारा दिया। उनकी पत्नी शांडिली उनके सबसे कठिन समय में उनकी शक्ति रही हैं। जब वे एक साथ दो-तीन पदों की जिम्मेदारियाँ सँभाल रहे थे, तब परिवार की यह थाती ही उनका संबल थी। उनकी दो वर्षीया पुत्री वरदा उनके जीवन की वह खुशी है जो हर थकान को दूर कर देती है।

विशाल मिश्र की कहानी हर उस युवा के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों और बड़े सपनों के बीच अपना रास्ता बना रहा है। यह कहानी यह बताती है कि भाषा, पृष्ठभूमि या असफलताएँ किसी को नहीं रोक सकतीं — यदि भीतर संकल्प हो, तो हर रुकावट एक सीढ़ी बन जाती है।