मजबूत - मजबूत इच्छाशक्ति वाले शख्स के तौर पर जाने जाते हैं भगवान शंकर

मजबूत - मजबूत इच्छाशक्ति वाले शख्स के तौर पर जाने जाते हैं भगवान शंकर

मजबूत - मजबूत इच्छाशक्ति वाले शख्स के तौर पर जाने जाते हैं भगवान शंकर

सिक्किम कैडर के 1988 बैच के ब्यूरोक्रट भगवान शंकर को पावर कारिडोर में एक समझदार और बेहद जानकार आईएएस अधिकारी माना जाता है । आईआईटी कानपुर से  सिविल इंजीनियरिंग में बी-टेक में अव्वल करने के बावजूद भगवान शंकर के मन में जनसामान्य के लिए काम करने की इच्छा थी , और यही उन्हे सिविल सर्विसेज की ओर खिंच लाई । उन्होंने पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में मास्टर्स भी किया है ।

 

केंद्र एंव राज्य सेवा में 31 वर्षों से महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभा रहे भगवान ने सब डिविजनल मजिस्ट्रेट के तौर पर अपना सफर शुरू किया था । गैंगटोक एडीएम के बाद वे साउथ सिक्किम के डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट बनाए गए , बताया जाता है कि इस दौरान इन्होने साउथ सिक्किम के विकास में बहुत कार्य किया ।‌ 1998 में इन्हे इंटर स्टेट डेप्यूटेशन पर उत्तर प्रदेश भेजा गया , जो कार्यकाल पांच साल का रहा , इस दौरान इन्होने महाराजगंज , सोनभद्र के जिलाधिकारी के साथ ही कई विभागों में महत्वपूर्ण पदों पर योगदान दिया । 

 

इन्हे जानने समझने की जिज्ञासा वाला ब्यूरोक्रेट माना जाता है ,जिस वजह से

इन्होने  देश विदेश के विभिन्न संस्थानों से समय समय पर कई ट्रेनिंग और स्पेशल कोर्स किए हैं , जिनमें यूनाईटेड किंगडम से पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन के लिए लिडरशिप एंड स्ट्राटेजिक ट्रेनिंग , यूएसए से फाइनेंशियल मैनेजमेंट , आईसीसीजी से इथिक इन पब्लिक सर्विस , टीआईएसएस से सोशल पालिसी एंड गवर्नेंस के साथ समय समय पर आईआईएम , बैंगलोर , आईआईएफटी नई दिल्ली से की गई कोर्स और ट्रेनिंग महत्वपूर्ण रहे हैं ।

इन्होने राज्य सरकार में कई विभागों में एडिशनल सेक्रेटरी, स्पेशल सेक्रेटरी सहित सेक्रेटरी के पद पर भी कार्य किया है ।

हर जगह इन्होने अपने उत्कृष्ट कार्यशैली की छाप छोड़ी , मिल्क यूनियन और स्टेट बैंक ऑफ सिक्किम के प्रबंध निदेशक भी रहे ।

इन्होने केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है जिनमें संयुक्त सचिव के तौर पर गृहमंत्रालय में इनके कार्य की सराहना इनके सहयोगी भी करते हैं ।

भगवान शंकर को भारत के राष्ट्रपति द्वारा वर्ष 2013 में सेंशश में विशिष्ट कार्य के लिए रजत पदक से सम्मानित किया गया ।