संकट में भी हौसला रखने के माहिर- तरूण बजाज

संकट में भी हौसला रखने के माहिर- तरूण बजाज

तरुण बजाज प्रशासनिक सेवा के सीनियर अधिकारी हैं । वैश्विक महामारी कोरोना के समय में जब लोगों में दहशत का माहौलथा और देश की अर्थव्यवस्था पर इसका व्यापक असर दिख रहा था। इस कठिन हालात में उन्हें वित्त मंत्रालय में आर्थिक मामलों का सचिव बनाया गया। लिहाजा अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने की बड़ी जिम्मेदारी उन्हें दी गयी।

आईएएस तरुण बजाज का जन्म 9 नवंबर 1962 दिल्लीमें हुआ।1988 बैच के हरियाणा कैडर के प्रशासनिक सेवा के अधिकारी तरुण ने दिल्ली के श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स से  स्नातक किया। उन्होंने लंदन स्लकू ऑफ इकोनॉमिक्स एंड पॉलिटिकल साइंस से पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की। तरुण बजाज ने आईआईएम अहमदाबाद से फाइनेंस में एमबीए किया। उन्हें हिंदी, अंग्रेजी और पंजाबी भाषा की अच्छी कड़ हैं । यूपीएससी की परीक्षा में सफल होने के बाद तरुण बजाज की पहली पोस्टिंग बतौर एस डीओ हुई । उसके बाद उन्हें ग्रामीणविकास विभाग में एडिशनलडिप्टी कमिश्नर बनाया गया। साल 1994 से  1997  तक वे हरियाणा में वित्त विभाग के फाइनेंस एडिशनलडिप्टी कमिश्नर रहे । इस दौरान उन्होंने वित्त विभाग में कई अहम कार्यों को बखूबी अंजाम तक पहुंचाया। अक्टूबर 1997 में पहली बार कैथल के डीसी बनाए गए।
ये दोनों जिलों में प्रशासनिक सुधार को अहमियत देने की वजह से  वे सुर्खियों में रहे । 1999 से  2002  तक स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड पंचकूला में मैनेजिंग  डायरेक्टर रहे । इसके अलावा आईएएस अधिकारी तरुण बजाज हरियाणा में कई अहम पदों पर रहे  जैसे – हरियाणा डेयरी डवेलपमेंट को-ऑपरेशन फेडरशेन लिमिटेड में मैनेजिंग  डायरेक्टर , स्टेट इलेक्ट्रिसिटी रगुेलेटरी कमीशन, पंचकूला में सेक्रेटरी बनाए गए।
 2006-07 के बीच तरुण बजाज वित्त मंत्रालय  में डायरेक्टर के पद पर रहे । 2007 से  2011  तक वित्त मंत्रालय  में ज्वाइंट सेक्रेटरी भी रह चुके हैं। इस दरम्यान वे मल्टी लेटरल फंडिंग एजेंसी डिवीजन के इंचार्ज थे  । उन्होंने  बीमा क्षेत्र की जिम्मेदारी भी संभाली और इंश्योरेंस सेक्टर में बजाज ने कई अहम सुधार किए। जिससे  इनके काम की तारीफ हुई। इसके बाद तरुण बजाज अप्रैल 2015 में पीएमओ में ज्वाइंट सेक्रेटरी
के पद पर रह । पीएमओ में करीब सवा दो साल सेवा देने के बाद पीएमओ में ही उन्हें एडिशनल सेक्रेटरी बनाया गया, तीन सालतक इस पद पर उच्च मानदंडों को स्थापित किया। उनकी ईमानदारी और कर्तव्य निष्ठा को दखते हुए उन्हें वित्त मंत्रालय  में सचिव पद की अहम जिम्मेदारी सौंपी गई हैं ।