विकास, नवाचार और जनविश्वास से नई पहचान गढ़ते अधिकारी : आदित्य रंजन:

सुलगते कोयलांचल में समुचित विस्थापन और पेयजल मुहैया कराने का करिश्मा

विकास, नवाचार और जनविश्वास से नई पहचान गढ़ते अधिकारी : आदित्य रंजन:

2015 बैच के आईएएस अधिकारी आदित्य रंजन, जो इससे पहले सूचना प्रौद्योगिकी निदेशक के रूप में कार्यरत थे, आज झारखंड के उन युवा और ऊर्जावान प्रशासनिक अधिकारियों में गिने जाते हैं जिन्होंने प्रशासन को केवल सरकारी व्यवस्था तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे जनभागीदारी, तकनीकी नवाचार और सतत विकास का माध्यम बना दिया। वर्तमान में धनबाद के उपायुक्त के रूप में कार्यरत आदित्य रंजन ने अपने दूरदर्शी नेतृत्व, पारदर्शी कार्यशैली और जनकेंद्रित सोच से जिले के प्रशासनिक परिदृश्य को नई दिशा दी है।

धनबाद, झारखंड का एक प्रमुख औद्योगिक और खनन-प्रधान जिला है, जहाँ की कुल जनसंख्या लगभग 26 लाख से अधिक है। ऐसे जटिल और बहुआयामी चुनौतियों वाले जिले में प्रशासनिक जिम्मेदारी सँभालना स्वयं में एक बड़ी परीक्षा होती है। एक ओर शहरीकरण का दबाव, दूसरी ओर पर्यावरणीय चुनौतियाँ, जल संकट, विस्थापन, रोजगार और आधारभूत संरचना की आवश्यकताएं — इन सबके बीच आदित्य रंजन ने विकास और मानवीय संवेदनशीलता के बीच संतुलन स्थापित करने का उल्लेखनीय प्रयास किया है।

आदित्य रंजन की कार्यशैली का सबसे प्रमुख पहलू है दूरगामी सोच। वे केवल तात्कालिक समस्याओं के समाधान तक सीमित नहीं रहते, बल्कि भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए योजनाओं को आकार देते हैं। यही कारण है कि उनके नेतृत्व में धनबाद प्रशासन ने जल संरक्षण, तकनीकी सहयोग, शिक्षा, कौशल विकास और नागरिक सुविधाओं के क्षेत्र में अनेक महत्वपूर्ण पहलें शुरू कीं। जल सुरक्षा के क्षेत्र में उनकी "जल सेवा" पहल विशेष रूप से उल्लेखनीय रही है, जिसमें जलाशयों के पुनर्जीवन, भूजल पुनर्भरण और सतत जल प्रबंधन पर केंद्रित व्यापक अभियान चलाया गया। इस पहल का उद्देश्य न केवल सभी के लिए 24 घंटे शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना, और अन्य वर्तमान आवश्यकताओं की पूर्ति करना है बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित जल संरचना भी तैयार करना है।

आदित्य रंजन ने तकनीक और शोध संस्थानों के सहयोग को भी प्रशासनिक विकास का महत्वपूर्ण आधार बनाया। आईआईटी (पूर्ववर्ती आईएसएम) धनबाद ने उन्हें धनबाद के 54वें उपायुक्त के रूप में उनकी साहसिक और पारदर्शी कार्यशैली के लिए सम्मानित किया। इस अवसर पर उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि शैक्षणिक उत्कृष्टता के साथ-साथ समाज के प्रति संवेदनशीलता उतनी ही आवश्यक है। सेवा, विनम्रता और दृढ़ता जैसे मूल्य जीवन की असली पूंजी हैं। प्रशासन और शैक्षणिक संस्थानों के बीच ऐसा समन्वय उनके आधुनिक प्रशासनिक दृष्टिकोण को दर्शाता है। इस साझेदारी के माध्यम से जल प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण, उद्यमिता और कौशल विकास जैसे क्षेत्रों में कई योजनाओं को गति मिली।

युवा सशक्तिकरण और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए भी उन्होंने उल्लेखनीय प्रयास किए। अटल सामुदायिक नवाचार केंद्र से जुड़े कार्यक्रमों को प्रोत्साहित कर उन्होंने जिले के युवाओं में उद्यमिता और नवाचार की संस्कृति विकसित करने की दिशा में ठोस कदम उठाए। उनका मानना है कि किसी भी जिले का वास्तविक विकास तभी संभव है जब उसके युवा आत्मनिर्भर और सक्षम बनें।

धनबाद के झरिया क्षेत्र में पुनर्वास और विकास कार्यों को नई गति देना उनके प्रशासनिक कार्यकाल की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक है। झरिया कोलफील्ड में लगभग दो सौ वर्षों के खनन इतिहास के कारण भूमिगत आग और भू-धंसान जैसी गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो गई हैं, जिनसे वहाँ के लोगों का जीवन और स्वास्थ्य गंभीर रूप से प्रभावित हो रहा है।

आदित्य रंजन ने झरिया पुनर्वास एवं विकास प्राधिकरण की प्रगति रिपोर्ट स्वयं प्रस्तुत की, जिसमें बेलगढ़िया और करमाटांड टाउनशिप में आधारभूत संरचना उन्नयन और सामुदायिक विकास कार्यों की विस्तृत जानकारी दी गई। बेलगढ़िया टाउनशिप में पूर्ण हो चुकी और आगामी परियोजनाओं की जानकारी देते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि पुनर्वास तभी पूर्ण माना जाएगा जब नई टाउनशिप में सड़क, परिवहन, अस्पताल, विद्यालय और पुलिस थाने जैसी सभी आवश्यक नागरिक सुविधाएं पूरी तरह क्रियाशील हो जाएं। फिलहाल, उन्होंने बेलगढ़िया में स्किल डेवलपमेंट और स्वरोजगार की कई योजनाएं शुरू करवायी हैं।

आदित्य रंजन के प्रयासों और बीसीसीएल की सीएसआर पहल के तहत बेलगढ़िया टाउनशिप में स्थानीय बेरोजगारों को चिन्हित कर पचास ई-रिक्शा बांटे गये हैं। इस योजना के अंतर्गत टाउनशिप में पर्यावरण-अनुकूल परिवहन को बढ़ावा देंगे। पुनर्वास के साथ-साथ आजीविका सृजन पर भी विशेष ध्यान दिया गया — महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों को सशक्त बनाने, हस्तशिल्प गतिविधियों को पुनर्जीवित करने और स्थानीय व्यापारिक अवसरों के विकास जैसी पहलों ने विस्थापित परिवारों को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

धनबाद जैसे औद्योगिक और घनी आबादी वाले जिले में स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां अधिक जटिल हैं। इसे ध्यान में रखते हुए आदित्य रंजन ने स्वास्थ्य विभाग, जिला प्रशासन और विभिन्न संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया। डिजिटल मॉनिटरिंग और नियमित समीक्षा बैठकों के माध्यम से स्वास्थ्य योजनाओं के क्रियान्वयन की निगरानी की गई।

आदित्य रंजन की दूरदृष्टि केवल वर्तमान तक सीमित नहीं है। उनके नेतृत्व में धनबाद में अनेक महत्वाकांक्षी परियोजनाओं की आधारशिला रखी जा रही है — गया पुल, मतकुरिया फ्लाईओवर, महिला तकनीकी विश्वविद्यालय, नॉलेज सिटी, केंद्रीय विद्यालय परिसर, कृषि प्रशिक्षण केंद्र और आईआईटी (पूर्ववर्ती आईएसएम) धनबाद के दूसरे परिसर जैसी परियोजनाएं आने वाले समय में धनबाद को शिक्षा, नवाचार और आधुनिक आधारभूत संरचना के एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित कर सकती हैं।

उनकी प्रशासनिक सोच का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि वे विकास को केवल निर्माण कार्यों तक सीमित नहीं मानते, बल्कि उसे सामाजिक परिवर्तन का माध्यम समझते हैं। जनसहभागिता आधारित प्रशासन उनकी पहचान बन चुका है — वे जनता से संवाद को प्रशासन की सबसे बड़ी शक्ति मानते हैं। पर्यावरण संरक्षण, तकनीकी नवाचार, युवाओं का सशक्तिकरण, महिला भागीदारी और जनसहयोग — इन सभी तत्वों को साथ लेकर चलने की उनकी शैली उन्हें विशिष्ट बनाती है।

आदित्य रंजन उन प्रशासनिक अधिकारियों में शामिल हैं जो यह सिद्ध करते हैं कि यदि इच्छाशक्ति स्पष्ट हो और दृष्टिकोण जनकेंद्रित हो, तो प्रशासन समाज में व्यापक और स्थायी परिवर्तन ला सकता है। आज धनबाद में विकास, पारदर्शिता और आधुनिक प्रशासन की जो नई पहचान बन रही है, उसमें आदित्य रंजन की निर्णायक भूमिका स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।