जनसेवा, नवाचार और सुशासन का सशक्त चेहरा : डॉ. गौरव कुमार सिंह
जबलपुर, मध्यप्रदेश को बनाया प्रगति और सुशासन का रोल मॉडल
डॉ. गौरव कुमार सिंह आज भारतीय प्रशासनिक सेवा के उन चुनिंदा अधिकारियों में गिने जाते हैं जिन्होंने प्रशासन को केवल सरकारी व्यवस्था तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे जनभागीदारी, नवाचार और सामाजिक परिवर्तन का माध्यम बना दिया। वर्ष 2013 बैच के छत्तीसगढ़ कैडर के आईएएस अधिकारी डॉ. सिंह वर्तमान में रायपुर के कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी के रूप में कार्यरत हैं। उनकी प्रशासनिक शैली तकनीक, संवेदनशीलता, जवाबदेही और परिणाम आधारित कार्यप्रणाली का अद्भुत संगम मानी जाती है।
डॉ. गौरव कुमार सिंह की पहचान एक ऐसे अधिकारी के रूप में बनी है जो जमीनी स्तर पर उतरकर समस्याओं का समाधान करने में विश्वास रखते हैं। उन्होंने अपने प्रशासनिक जीवन में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों से लेकर राज्य की राजधानी तक, हर स्थान पर अपनी अलग छाप छोड़ी है। उनकी कार्यशैली का सबसे बड़ा गुण यह है कि वे योजनाओं को केवल कागज़ों तक सीमित नहीं रहने देते, बल्कि उन्हें जनता के जीवन में वास्तविक परिवर्तन का माध्यम बनाते हैं।
उनकी शैक्षणिक यात्रा भी अत्यंत प्रेरणादायक रही है। उत्तर प्रदेश के हरदोई में जन्मे डॉ. सिंह ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई केएनआईटी सुल्तानपुर से की। इसके बाद उन्होंने आईआईटी दिल्ली से एमटेक और पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। इतनी उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद भी उन्होंने निजी क्षेत्र के आकर्षक अवसरों की बजाय जनसेवा का मार्ग चुना और यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2013 में अखिल भारतीय स्तर पर 190वीं रैंक प्राप्त कर भारतीय प्रशासनिक सेवा में चयनित हुए।
डॉ. सिंह का प्रशासनिक जीवन विविध अनुभवों से भरा रहा है। दंतेवाड़ा जैसे नक्सल प्रभावित क्षेत्र में उन्होंने प्रशासन को जनता तक पहुँचाने का ऐतिहासिक कार्य किया। यहाँ उन्होंने 'यूपीएससी मेंटरशिप मॉडल' शुरू किया, जिसने आदिवासी युवाओं को सिविल सेवा जैसी प्रतिष्ठित परीक्षाओं की तैयारी के लिए प्रेरित किया। यह मॉडल राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित हुआ और अनेक युवाओं को नई दिशा मिली।
दंतेवाड़ा में ही उन्होंने 'प्रोजेक्ट कड़कनाथ', 'प्रोजेक्ट शक्ति गारमेंट' और 'प्रोजेक्ट बीपीओ' जैसी पहलों के माध्यम से स्थानीय युवाओं और महिलाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए। आदिवासी संस्कृति और परंपरा को सहेजने के लिए उन्होंने 'अंतरराष्ट्रीय ट्राइबल फेस्टिवल और समिट' का आयोजन कराया, जिसने दंतेवाड़ा को राष्ट्रीय पहचान दिलाई।
सुरजपुर के कलेक्टर के रूप में उनका कार्यकाल भी अत्यंत प्रभावशाली रहा। कोविड महामारी के कठिन समय में उन्होंने ऑक्सीजन प्लांट स्थापित कराया, स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया और गाँव-गाँव तक राहत पहुँचाने का कार्य किया। 'प्रशासन तुहर द्वार' और 'जन संवाद' जैसी पहलों के माध्यम से उन्होंने सरकारी सेवाओं को सीधे लोगों के घर तक पहुँचाया।
मूंगेली और बालोद में भी उन्होंने शिक्षा, संस्कृति, खेल और जनसंवाद को नई दिशा दी। '100 जन चौपाल' जैसी पहल यह दर्शाती है कि वे जनता से सीधे संवाद में विश्वास रखते हैं। वहीं 'कला केंद्र' और आधुनिक पुस्तकालयों की स्थापना से उन्होंने युवाओं को रचनात्मक और बौद्धिक मंच प्रदान किया।
वर्तमान में रायपुर कलेक्टर के रूप में डॉ. गौरव कुमार सिंह ने प्रशासनिक नवाचारों की एक नई मिसाल स्थापित की है। उनके नेतृत्व में 'चलो कुछ अच्छा करते हैं' अभियान के अंतर्गत 100 से अधिक नवाचारी परियोजनाएँ संचालित की जा रही हैं, जो स्वास्थ्य, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, कृषि, कौशल विकास, पर्यावरण और सुशासन जैसे अनेक क्षेत्रों को प्रभावित कर रही हैं।
स्वास्थ्य क्षेत्र में 'प्रोजेक्ट धड़कन', 'प्रोजेक्ट रक्षा' और 'प्रोजेक्ट दृष्टि' जैसी पहलों के माध्यम से हजारों बच्चों और नागरिकों को निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान की गईं। वहीं 'प्रोजेक्ट हेल्दी लाइफस्टाइल क्लीनिक' और 'प्रोजेक्ट हर घर मूंगा' जैसी योजनाओं ने जनस्वास्थ्य के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव लाया।
शिक्षा और युवा सशक्तिकरण के क्षेत्र में उनके कार्य विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। 'प्रोजेक्ट अनुभव' के माध्यम से यूपीएससी और छत्तीसगढ़ पीएससी अभ्यर्थियों को वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा मार्गदर्शन दिया गया, जिसके परिणामस्वरूप अनेक विद्यार्थियों का चयन हुआ। 'प्रोजेक्ट अंतरिक्ष' के तहत छत्तीसगढ़ की पहली स्पेस लैब स्थापित की गई, जिससे हजारों विद्यार्थियों को विज्ञान और अंतरिक्ष के क्षेत्र में सीखने का अवसर मिला।
डॉ. सिंह ने प्रशासन को तकनीक से जोड़कर सुशासन की नई परिभाषा भी दी है। 'मोर रायपुर ऐप्प', 'प्रोजेक्ट समाधान', 'प्रोजेक्ट सरल' और 'सुशासन एक्सप्रेस' जैसी पहलों ने सरकारी सेवाओं को पारदर्शी, तेज और नागरिकों के लिए अधिक सुलभ बनाया। लाखों लोगों की समस्याओं का समाधान समयबद्ध तरीके से किया गया, जिससे जनता का प्रशासन पर विश्वास और मजबूत हुआ।
महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में 'लखपति दीदी', 'पिंक दीदी' और 'प्रोजेक्ट एजए' जैसी योजनाओं ने हजारों महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया। विशेष रूप से 'प्रोजेक्ट एजए' को राष्ट्रीय स्तर पर ईटी गॉवटेक 2026 से सम्मानित किया गया।
पर्यावरण संरक्षण और जल संवर्धन के क्षेत्र में भी उनके प्रयास उल्लेखनीय रहे हैं। 'ग्रीन पालना', 'हरियर पाठशाला' और 'अमृत' जैसी योजनाओं ने जनभागीदारी के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण को एक सामाजिक आंदोलन का रूप दिया। जल संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्यों के लिए रायपुर को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान भी प्राप्त हुआ।
डॉ. गौरव कुमार सिंह संकट प्रबंधन में भी अत्यंत सक्षम अधिकारी माने जाते हैं। चाहे रायपुर की भीषण आग की घटनाएँ हों, कोविड महामारी का संकट हो या बोरवेल रेस्क्यू ऑपरेशन—हर परिस्थिति में उन्होंने तेज निर्णय क्षमता और मानवीय दृष्टिकोण का परिचय दिया।
उनकी कार्यशैली का सबसे प्रेरणादायक पक्ष यह है कि वे प्रशासन को केवल नियंत्रण का माध्यम नहीं, बल्कि समाज निर्माण का साधन मानते हैं। वे मानते हैं कि सुशासन का वास्तविक उद्देश्य आम नागरिक के जीवन को बेहतर बनाना है। यही कारण है कि उनके नेतृत्व में प्रशासनिक योजनाएँ केवल सरकारी आंकड़े नहीं बनतीं, बल्कि लोगों के जीवन में वास्तविक बदलाव लाती हैं।
आज डॉ. गौरव कुमार सिंह एक ऐसे प्रशासनिक अधिकारी के रूप में स्थापित हो चुके हैं जिनकी पहचान नवाचार, जनसंवेदनशीलता और परिणाम आधारित कार्यशैली से होती है। उनका जीवन और कार्य यह संदेश देता है कि यदि प्रशासनिक इच्छाशक्ति मजबूत हो, तो शासन व्यवस्था समाज में व्यापक और स्थायी परिवर्तन ला सकती है।