दूरदर्शी नेतृत्व, जनकेंद्रित प्रशासन और समावेशी विकास की मिसाल : कोमल मित्तल

मोहाली, पंचाब को बनाया अंतरराष्ट्रीय स्तर का शहर

दूरदर्शी नेतृत्व, जनकेंद्रित प्रशासन और समावेशी विकास की मिसाल : कोमल मित्तल

पंजाब के साहबजादा अजित सिंह नगर यानी मोहाली की डिप्टी कमिश्नर कोमल मित्तल उन विरले प्रशासनिक अधिकारियों में से एक हैं, जिन्होंने सरकारी सेवा को केवल एक पद नहीं, बल्कि समाज को बदलने का एक सशक्त माध्यम बनाया है। 2014 बैच की पंजाब कैडर की आईएएस अधिकारी कोमल मित्तल अपनी दूरदर्शी सोच, पारदर्शी कार्यशैली और जनकेंद्रित प्रशासन के लिए पंजाब के सबसे सम्मानित और गतिशील प्रशासकों में गिनी जाती हैं। जिला प्रशासन, शिक्षा, सामाजिक कल्याण, महिला सशक्तिकरण, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण विकास जैसे अनेक क्षेत्रों में उनके योगदान ने हजारों जीवनों को प्रभावित किया है और सार्वजनिक प्रशासन में उत्कृष्टता का एक नया मापदंड स्थापित किया है।

कोमल मित्तल की प्रशासनिक यात्रा में अनुभव की गहराई और विविधता दोनों हैं। उन्होंने मुकेरियां में उप-मंडल मजिस्ट्रेट के रूप में अपनी सेवा की शुरुआत की और जमीनी प्रशासन की बारीकियाँ बारीकी से सीखीं। यहीं से उनकी जनकेंद्रित कार्यशैली की नींव पड़ी, जो आगे चलकर उनकी प्रशासनिक पहचान का आधार बनी। इसके बाद मोहाली में ही उन्होंने कई पदों पर रहकर शहरी शासन, नागरिक सुधार और नियोजित विकास के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य किए।

अमृतसर नगर निगम में अतिरिक्त आयुक्त के पद पर रहते हुए उन्होंने नगरीय प्रशासन को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और जनोन्मुखी बनाने की दिशा में ठोस प्रयास किए। पंजाब सरकार में खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग में अतिरिक्त सचिव के रूप में उन्होंने नीति-निर्माण और प्रशासनिक सुधारों में सक्रिय योगदान दिया। होशियारपुर की डिप्टी कमिश्नर के रूप में उनका कार्यकाल विशेष रूप से चर्चित और उपलब्धिपूर्ण रहा, जहाँ उनकी अनेक अभिनव पहलों ने जिले को राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान दिलाई। वर्तमान में वह मोहाली की डिप्टी कमिश्नर के रूप में प्रशासनिक उत्कृष्टता के नए आयाम स्थापित कर रही हैं।

कोमल मित्तल का यह दृढ़ विश्वास है कि शिक्षा ही वह आधार है जिस पर समाज का स्थायी और समावेशी विकास संभव है। इसी सोच को जमीन पर उतारते हुए उन्होंने होशियारपुर में पंजाब की पहली डिजिटल लाइब्रेरी की स्थापना की। यह पहल न केवल डिजिटल शिक्षा और ज्ञान तक पहुँच को सुलभ बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम था, बल्कि युवाओं को आधुनिक तकनीक और सूचना की दुनिया से जोड़ने का एक प्रभावशाली माध्यम भी बना। ग्रामीण और शहरी, दोनों वर्गों के विद्यार्थियों को इस पहल से लाभ मिला। होशियारपुर जिला डिजिटल शिक्षा के क्षेत्र में एक अनुकरणीय उदाहरण बन गया, जिसे अन्य जिलों ने भी अपनाने की प्रेरणा ली।

पर्यावरण और कृषि के प्रति उनकी गहरी संवेदनशीलता उनकी प्रशासनिक पहचान का एक महत्वपूर्ण और विशिष्ट हिस्सा है। होशियारपुर में उन्होंने विद्यालयों में पर्यावरण और सस्टेनेबिलिटी से जुड़ी पहलों को बड़े पैमाने पर लागू किया। छात्रों को पर्यावरण के प्रति जागरूक बनाने और हरित जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। इन प्रयासों के फलस्वरूप होशियारपुर को प्रतिष्ठित "बेस्ट ग्रीन डिस्ट्रिक्ट अवार्ड" से सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार न केवल उनके अथक प्रयासों की स्वीकृति था, बल्कि यह संदेश भी था कि पर्यावरण चेतना को यदि शिक्षा और प्रशासन से जोड़ा जाए तो परिवर्तन न केवल संभव है, बल्कि स्थायी भी होता है।

टिकाऊ कृषि की दिशा में भी उनका योगदान उल्लेखनीय रहा। उन्होंने होशियारपुर जिले में फसल विविधीकरण और मूँगफली की खेती को बढ़ावा देकर किसानों को परंपरागत और एकरस फसल चक्र से बाहर निकलने का अवसर दिया। इस पहल ने किसानों की आजीविका को अधिक सुरक्षित और लाभकारी बनाने के साथ-साथ भूमि की दीर्घकालिक उत्पादकता को भी सुनिश्चित किया।

कोमल मित्तल का यह दृढ़ मानना है कि समाज का वास्तविक विकास तब तक अधूरा है जब तक महिलाएँ और बालिकाएँ उसमें समान और सक्रिय भागीदार न हों। इसी दृष्टिकोण के साथ उन्होंने बालिकाओं के लिए कौशल विकास, आत्मविश्वास निर्माण और नेतृत्व क्षमता को केंद्र में रखकर प्रशिक्षण एवं सशक्तिकरण शिविरों का बड़े पैमाने पर आयोजन किया। इन शिविरों ने न केवल लड़कियों में आत्मनिर्भरता की भावना जगाई, बल्कि उन्हें यह विश्वास भी दिलाया कि उनके सपने बड़े हो सकते हैं और उन्हें साकार करने की शक्ति उनके भीतर ही है।

समावेशी विकास के प्रति उनकी प्रतिबद्धता उनकी "विंग्स" पहल में सबसे स्पष्ट और मार्मिक रूप से दिखती है। यह कार्यक्रम विशेष रूप से दिव्यांग युवाओं के लिए बनाया गया, ताकि उनकी छुपी हुई प्रतिभा को पहचाना जा सके और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ा जा सके। इस पहल ने यह महत्वपूर्ण संदेश दिया कि प्रत्येक व्यक्ति की अपनी विशिष्ट क्षमता होती है और प्रशासन का दायित्व है कि वह हर नागरिक को उड़ान भरने के लिए आवश्यक वातावरण और अवसर उपलब्ध कराए।

कोमल मित्तल ने चुनाव प्रबंधन में भी अपनी प्रशासनिक कुशलता और निष्पक्षता का प्रमाण दिया। उनके कुशल नेतृत्व और सूक्ष्म प्रबंधन को देखते हुए पंजाब के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने उन्हें "बेस्ट डिस्ट्रिक्ट इलेक्शन ऑफिसर अवार्ड" से सम्मानित किया। यह पुरस्कार उनके पारदर्शी, निष्पक्ष और प्रभावी चुनाव प्रबंधन का प्रमाण है — एक ऐसा योगदान जो लोकतंत्र की जड़ों को मजबूत करने के लिए अत्यंत आवश्यक है।

मोहाली में डिप्टी कमिश्नर के रूप में उन्होंने नशे की गंभीर समस्या से लड़ने के लिए युवाओं को केंद्र में रखकर व्यापक जागरूकता अभियान चलाए। उनका स्पष्ट मानना है कि यदि युवाओं को सही दिशा, उचित अवसर और सकारात्मक वातावरण मिले, तो वे नशे की दलदल से न केवल बाहर निकल सकते हैं, बल्कि समाज के निर्माण में भी अग्रणी भूमिका निभा सकते हैं। उनके इन प्रयासों ने जिले में एक नई उम्मीद और सकारात्मक ऊर्जा का संचार किया है।

कोमल मित्तल की प्रशासनिक यात्रा यह सिद्ध करती है कि जब दक्षता, करुणा, नवाचार और नैतिकता एकसाथ आती हैं, तो प्रशासन केवल एक तंत्र नहीं, जनजीवन का स्थायी और विश्वसनीय हिस्सा बन जाता है। उनके नेतृत्व में शिक्षा, पर्यावरण, महिला सशक्तिकरण, समावेशी विकास और नागरिककेंद्रित शासन के क्षेत्रों में जो परिवर्तन आए हैं, वे दीर्घकालिक, प्रेरणादायक और अनुकरणीय हैं। आज कोमल मित्तल उन प्रशासनिक अधिकारियों की अग्रिम पंक्ति में खड़ी हैं, जो यह विश्वास दिलाती हैं कि सार्वजनिक सेवा अभी भी सच्चे और गहरे अर्थों में समाज की सेवा कर सकती है — और यही उनकी सबसे बड़ी, सबसे स्थायी उपलब्धि है।