जनसेवा, संवेदनशीलता और दूरदृष्टि के पर्याय : मनमोहन शर्मा

सोलन हिमाचल में उद्योगों और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाया

जनसेवा, संवेदनशीलता और दूरदृष्टि के पर्याय : मनमोहन शर्मा

मनमोहन शर्मा हिमाचल प्रदेश प्रशासनिक सेवा के उन प्रतिष्ठित अधिकारियों में गिने जाते हैं जिन्होंने अपनी शांत कार्यशैली, जनसरोकार और परिणामोन्मुख दृष्टिकोण से प्रशासनिक जगत में विशेष पहचान बनाई है। वर्ष 2013 बैच के हिमाचल प्रदेश कैडर के आईएएस अधिकारी मनमोहन शर्मा वर्तमान में हिमाचल के सबसे महत्त्वपूर्ण जिलों में से एक सोलन के उपायुक्त एवं जिला दंडाधिकारी के रूप में कार्यरत हैं।

हिमाचल प्रदेश के ठियोग क्षेत्र से संबंध रखने वाले मनमोहन शर्मा की जीवन यात्रा संघर्ष, धैर्य और निरंतर मेहनत की प्रेरक कहानी है। विज्ञान में स्नातक करने के बाद उन्होंने विधि की शिक्षा प्राप्त की तथा पर्सोनल मैनेजमेंट एवं लेबर वेलफेयर में स्नातकोत्तर डिप्लोमा हासिल किया। हिमाचल प्रदेश प्रशासनिक सेवा परीक्षा को सफलतापूर्वक उत्तीर्ण करने के पीछे उनका अथक परिश्रम और दृढ़ इच्छाशक्ति रही। उनका मानना है कि सफलता का मार्ग कठिनाइयों से होकर गुजरता है और जो निरंतर प्रयास करते हैं, वही अंततः सफलता प्राप्त करते हैं।

अपने प्रशासनिक जीवन में उन्होंने अनेक महत्वपूर्ण दायित्व निभाए हैं। वे नालागढ़ में एसडीएम और नाहन में अतिरिक्त उपायुक्त के रूप में कार्य कर चुके हैं। इसके अलावा शिमला में प्रारंभिक शिक्षा निदेशक, शहरी विकास निदेशक, शिमला स्मार्ट सिटी लिमिटेड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी तथा हिमाचल प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड में कार्मिक एवं वित्त निदेशक जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भी उन्होंने अपनी सेवाएं दी हैं। इन सभी दायित्वों में उनकी कार्यशैली का मूल केंद्र रहा—जनसरोकार, पारदर्शिता और परिणाम आधारित प्रशासन।

सोलन के उपायुक्त के रूप में उनका कार्यकाल बहुआयामी विकास और सुशासन का उदाहरण बनकर सामने आया है। कानून व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ उन्होंने जनशिकायतों के त्वरित समाधान, राजस्व प्रशासन को मजबूत करने और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी बनाने पर विशेष ध्यान दिया। नियमित जनसुनवाई, राजस्व लोक अदालतों और फील्ड निरीक्षणों के माध्यम से उन्होंने आम लोगों की समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर हल करने का प्रयास किया।

सोलन जिले में अतिक्रमण हटाने और सरकारी भूमि की सुरक्षा को लेकर भी उन्होंने प्रभावी कदम उठाए। अवैध कब्जों को हटाने, राजस्व अभिलेखों को व्यवस्थित करने और प्रशासनिक निगरानी को मजबूत करने से भूमि प्रबंधन व्यवस्था में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला। हथियार लाइसेंस, पेट्रोल पंप एनओसी, सिनेमा लाइसेंस और सोसायटी पंजीकरण जैसे कार्यों को भी अधिक सुव्यवस्थित और पारदर्शी बनाया गया।

कालका-शिमला राष्ट्रीय राजमार्ग-5 के फोरलेन निर्माण कार्य की निगरानी भी उनके महत्वपूर्ण दायित्वों में शामिल रही। परियोजना से जुड़े मुआवजा, क्षति और पुनर्वास मामलों की नियमित समीक्षा कर उन्होंने प्रभावित लोगों की समस्याओं के समाधान में सक्रिय भूमिका निभाई।

पर्यावरण संरक्षण और कचरा प्रबंधन के क्षेत्र में भी उनका कार्य उल्लेखनीय रहा है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण से जुड़े मामलों, प्रदूषण नियंत्रण और गैर-जैविक कचरे के प्रबंधन पर उन्होंने विशेष ध्यान दिया। हिमाचल प्रदेश गैर-जैविक कचरा नियंत्रण अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन से जिले में स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को मजबूती मिली।

युवा सशक्तिकरण और कौशल विकास को लेकर उनकी दृष्टि विशेष रूप से उल्लेखनीय है। उनके नेतृत्व में विभिन्न कौशल विकास और व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों को गति मिली। अंग्रेजी रोजगार क्षमता, उद्यमिता, टेलीकॉम, प्लंबिंग, निर्माण कार्य, स्वास्थ्य सेवा, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, लॉजिस्टिक्स, फूड प्रोसेसिंग, ब्यूटी एवं वेलनेस जैसे अनेक क्षेत्रों में युवाओं को प्रशिक्षण उपलब्ध कराया गया। एशियन डेवलपमेंट बैंक समर्थित परियोजनाओं के माध्यम से हजारों युवाओं को रोजगारोन्मुख प्रशिक्षण प्रदान किया गया।

शिक्षा के क्षेत्र में भी उन्होंने महत्वपूर्ण योगदान दिया। “अपना विद्यालय : हिमाचल स्कूल एडॉप्शन प्रोग्राम” के अंतर्गत उन्होंने राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय कोठों को गोद लेकर वहां शैक्षिक और आधारभूत सुविधाओं के विकास पर कार्य किया। उनका मानना है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा ही समाज को दीर्घकालिक रूप से मजबूत बना सकती है।

आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में मनमोहन शर्मा का कार्य विशेष रूप से सराहनीय रहा है। वर्ष 2023 में हिमाचल प्रदेश में आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन के बाद उन्होंने पुनर्वास और आपदा प्रतिरोधी विकास की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की। “मॉडल रेजिलिएंट विलेज” परियोजना के अंतर्गत नालागढ़ क्षेत्र के सुनानी गांव में पुनर्निर्माण, आधारभूत ढांचे की बहाली और आजीविका सुदृढ़ीकरण का कार्य शुरू किया गया। यह परियोजना जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान तथा विभिन्न सामाजिक संगठनों के सहयोग से संचालित की जा रही है।

भूस्खलन और मिट्टी का कटाव एक आम समस्या है, जो लगातार विकराल हो रही है, लेकिन इससे निपटने के लिए उन्होंने जैव-इंजीनियरिंग आधारित समाधान को प्रोत्साहित किया। सोलन के बार्टी कृषि फार्म में वेटिवर घास नर्सरी की स्थापना इसी दिशा में एक अभिनव पहल रही जिसका उद्देश्य पारंपरिक संरचनात्मक उपायों पर निर्भरता कम कर पर्यावरण-अनुकूल और टिकाऊ समाधान विकसित करना है। चिन्हित भूस्खलन क्षेत्रों में वेटिवर घास का रोपण भी कराया गया, जिससे मिट्टी स्थिरीकरण और आपदा जोखिम न्यूनीकरण में मदद मिली।

आपदा जागरूकता को जन-आंदोलन बनाने के लिए उनके नेतृत्व में मॉक ड्रिल, प्रशिक्षण कार्यक्रम, नुक्कड़ नाटक और जागरूकता अभियान भी आयोजित किए गए। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और विभिन्न विभागों के सहयोग से संचालित इन कार्यक्रमों ने लोगों को आपदा के प्रति अधिक सजग बनाया।

ग्रामीण विकास योजनाओं की निगरानी और प्रभावी क्रियान्वयन में भी उनका योगदान उल्लेखनीय रहा है। मनरेगा, स्वच्छ भारत मिशन, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, प्रधानमंत्री आवास योजना, मुख्यमंत्री आवास योजना और प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना जैसी योजनाओं को उन्होंने बेहतर समन्वय और निगरानी के माध्यम से गति प्रदान की।

महिला एवं बाल विकास योजनाओं के क्रियान्वयन पर भी उन्होंने विशेष ध्यान दिया। मुख्यमंत्री कन्यादान योजना, मिशन वात्सल्य, पोषण अभियान और महिला सशक्तिकरण कार्यक्रमों के माध्यम से समाज के कमजोर वर्गों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने का प्रयास किया गया।

मनमोहन शर्मा की सबसे बड़ी विशेषता उनकी संतुलित और संवेदनशील कार्यशैली है। वे केवल आदेश देने तक सीमित नहीं रहते, बल्कि संवाद, समन्वय और जनभागीदारी के माध्यम से शासन व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने में विश्वास रखते हैं। नियमित फील्ड विजिट और जनसंवाद के जरिए उन्होंने प्रशासन को जनता के और करीब लाने का प्रयास किया है।

आज जब देश को ऐसे अधिकारियों की आवश्यकता है जो विकास, पर्यावरण संरक्षण और जनहित के बीच संतुलन स्थापित कर सकें, तब मनमोहन शर्मा एक प्रेरक उदाहरण के रूप में सामने आते हैं। उनकी कार्यशैली यह दर्शाती है कि यदि दृष्टिकोण जनकेंद्रित हो और इच्छाशक्ति मजबूत हो, तो प्रशासन समाज में वास्तविक और सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है।