नई सोच वाले जन-केंद्रित प्रशासन का प्रेरक चेहरा : मंजुनाथ भाजंत्री
रांची, झारखंड के जन-मानस मे प्रशासन के प्रति विश्वास जगाया
झारखंड प्रशासनिक व्यवस्था में यदि किसी अधिकारी का नाम जनविश्वास, पारदर्शिता और संवेदनशील शासन के प्रतीक के रूप में लिया जाता है, तो उनमें मंजुनाथ भाजंत्री का नाम अत्यंत सम्मान और प्रतिष्ठा के साथ शामिल होता है। वर्ष 2011 बैच के झारखंड कैडर के भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारी मंजुनाथ भाजंत्री वर्तमान में रांची जिले के उपायुक्त एवं जिलाधिकारी के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
कर्नाटक के बेलगाम (बेलागावी) से आने वाले भाजंत्री ने आईआईटी , मुंबई से कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग में बी.टेक. की शिक्षा प्राप्त की। वे उन अधिकारियों में शामिल हैं जिन्होंने टेक्नोलॉजी और प्रशासन का प्रभावी समन्वय स्थापित कर शासन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, उत्तरदायी और जनोन्मुख बनाया। एक दशक से अधिक के प्रशासनिक अनुभव में उन्होंने झारखंड के कई जिलों में कार्य करते हुए विकास और सुशासन की नई मिसालें कायम की हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास, महिला सशक्तिकरण, आजीविका संवर्धन, प्रशासनिक सुधार और संकट प्रबंधन जैसे अनेक क्षेत्रों में उनके कार्य उल्लेखनीय माने जाते हैं। उनकी कार्यशैली की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे प्रशासन को केवल सरकारी प्रक्रिया नहीं, बल्कि समाज परिवर्तन का माध्यम मानते हैं।
मंजुनाथ भाजंत्री “फील्ड एडमिनिस्ट्रेशन” में गहरी आस्था रखते हैं। वे कार्यालयों तक सीमित रहने वाले अधिकारी नहीं, बल्कि गांवों, दूरस्थ इलाकों और आम लोगों के बीच जाकर समस्याओं को समझने वाले प्रशासक हैं। यही कारण है कि उनकी योजनाएं और पहलें सीधे जनता के जीवन को प्रभावित करती हैं।
देवघर जिले में उपायुक्त के रूप में उनका कार्यकाल उनकी प्रशासनिक क्षमता और संकट प्रबंधन कौशल का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जाता है। देवघर रोपवे हादसा झारखंड के सबसे गंभीर आपदा घटनाक्रमों में से एक था। इस दौरान मंजुनाथ भाजंत्री ने भारतीय वायुसेना, एनडीआरएफ और स्थानीय प्रशासन के साथ अभूतपूर्व समन्वय स्थापित कर बचाव अभियान का सफल संचालन किया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वे लगातार घटनास्थल पर मौजूद रहे और हर स्तर पर राहत एवं बचाव कार्यों की निगरानी करते रहे। उनकी इस भूमिका की राष्ट्रीय स्तर पर सराहना हुई।
पूर्वी सिंहभूम (जमशेदपुर) में उपायुक्त रहते हुए उन्होंने स्थानीय कारीगरों और हस्तशिल्प को बढ़ावा देने के लिए “विश्वकर्मा पॉइंट” जैसी अभिनव पहल शुरू की। इस विशेष केंद्र का उद्देश्य स्थानीय शिल्पकारों को सम्मानजनक बाजार उपलब्ध कराना था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बोड़ाम प्रखंड के अंधारझोर गांव के दौरे के दौरान उन्होंने देखा कि पारंपरिक वाद्य यंत्र बनाने वाले कारीगर संसाधनों और बाजार के अभाव में संघर्ष कर रहे हैं। इसके बाद उन्होंने कारीगरों की सोसायटी का गठन करवाया, बैंक खाते खुलवाए और सरकारी सहायता सुनिश्चित करवाई। यह कदम ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पारंपरिक कला को नई ऊर्जा देने वाला माना गया।
वर्तमान में रांची के उपायुक्त के रूप में मंजुनाथ भाजंत्री ने प्रशासन को अधिक पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनाने की दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। “अबुआ साथी” जन शिकायत निवारण प्रणाली उनकी सबसे चर्चित पहलों में से एक है। इस व्यवस्था के माध्यम से लोग व्हाट्सएप, ईमेल, एसएमएस, पोर्टल और हस्तलिखित आवेदन के जरिए सीधे उपायुक्त कार्यालय तक अपनी शिकायत पहुंचा सकते हैं। शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए जिला स्तर से लेकर प्रखंड और पंचायत स्तर तक अधिकारियों की जवाबदेही तय की गई है। मीडिया रिपोर्ट्स में इस पहल को “डिजिटल और संवेदनशील प्रशासन का उत्कृष्ट मॉडल” बताया गया है।
उन्होंने जनता दरबार की व्यवस्था को भी अत्यंत प्रभावी बनाया। प्रत्येक सोमवार वे स्वयं आम नागरिकों से मिलते हैं, उनकी समस्याएं सुनते हैं और संबंधित अधिकारियों को तत्काल समाधान के निर्देश देते हैं। इस प्रक्रिया में जिले के सभी प्रखंड विकास पदाधिकारी और अंचल अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े रहते हैं। इतना ही नहीं, उन्होंने इस मॉडल को प्रखंड और अंचल स्तर तक भी विस्तारित किया, जहां प्रत्येक मंगलवार को स्थानीय जनता दरबार आयोजित किए जाते हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए जिला मुख्यालय तक आने की आवश्यकता नहीं पड़ती।
भूमि विवादों के समाधान के क्षेत्र में भी उनका कार्य अत्यंत उल्लेखनीय रहा है। झारखंड में छोटे भूमि विवाद वर्षों तक लंबित रहते हैं और कई बार सामाजिक तनाव का कारण बनते हैं। इसे ध्यान में रखते हुए उन्होंने 10 डिसमिल तक की जमीन से जुड़े मामलों के त्वरित समाधान का विशेष अभियान चलाया। अधिकारियों ने लगातार कार्य करते हुए बड़ी संख्या में लंबित मामलों का निपटारा किया। मीडिया रिपोर्ट्स में इसे आम लोगों को राहत देने वाला ऐतिहासिक कदम बताया गया।
महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में “मइया स्वावलंबन” अभियान उनकी दूरदर्शी सोच का उदाहरण है। इस पहल के माध्यम से स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को पोल्ट्री, बकरी पालन, बतख पालन और छोटे उद्योगों से जोड़कर स्वरोजगार उपलब्ध कराया गया। हजारों महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में यह अभियान अत्यंत सफल माना गया।
युवाओं के लिए शुरू किया गया “100 एंटरप्रेन्योर्स प्रोग्राम” भी उनकी अभिनव सोच को दर्शाता है। इस कार्यक्रम के तहत चयनित युवाओं को प्रशिक्षण, मेंटरशिप, निवेशकों से संपर्क और सीड फंडिंग जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। विशेष रूप से महिलाओं और वंचित वर्गों को प्राथमिकता देकर यह कार्यक्रम समावेशी विकास का प्रभावी उदाहरण बनकर उभरा है।
मंजुनाथ भाजंत्री प्रशासनिक कर्मचारियों के नैतिक और मानवीय विकास पर भी विशेष जोर देते हैं। उन्होंने राजस्व और अंचल कर्मियों के लिए क्षमता विकास कार्यशालाओं की शुरुआत की, जिनमें कर्मचारियों को तकनीकी प्रशिक्षण के साथ-साथ संवेदनशीलता और मानवीय मूल्यों का भी प्रशिक्षण दिया जाता है।
उनकी कार्यशैली की सबसे बड़ी पहचान है—सीधा संवाद, त्वरित निर्णय और पारदर्शिता। वे सोशल मीडिया के माध्यम से भी जनता से लगातार जुड़े रहते हैं और लोगों की समस्याओं पर त्वरित प्रतिक्रिया देते हैं। यही कारण है कि आम नागरिकों के बीच उनकी छवि एक सुलभ, संवेदनशील और कर्मठ अधिकारी की बनी हुई है।
मंजुनाथ भाजंत्री आज उन चुनिंदा प्रशासनिक अधिकारियों में गिने जाते हैं जिन्होंने यह साबित किया है कि यदि प्रशासनिक इच्छाशक्ति मजबूत हो और जनसेवा के प्रति समर्पण सच्चा हो, तो शासन व्यवस्था समाज में वास्तविक और सकारात्मक परिवर्तन ला सकती है। उनकी प्रशासनिक यात्रा केवल सफलता की कहानी नहीं, बल्कि संवेदनशील नेतृत्व, नवाचार और जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देने वाले प्रशासन की प्रेरक गाथा है।