नवाचार, जल-संरक्षण और जन-केंद्रित शासन के प्रणेता : मयूर दीक्षित
हरिद्वार, उत्तराखंड को बनाया सुव्यवस्था और कुशल प्रबंधन का उदाहरण
उत्तराखंड की पवित्र भूमि पर स्थित हरिद्वार जिले के वर्तमान जिला मजिस्ट्रेट श्री मयूर दीक्षित, आईएएस, भारतीय प्रशासनिक सेवा के उन उज्ज्वल सितारों में से एक हैं जिनकी यात्रा बौद्धिक उत्कृष्टता, नवाचारी सोच और अटूट जन-सेवा भावना का अद्भुत संगम है। 2013 बैच के उत्तराखंड कैडर के इस अधिकारी ने आईआईटी कानपुर, आईआईएम बेंगलुरु और नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं से शिक्षा प्राप्त कर प्रशासनिक सेवा को चुना। आईएएस परीक्षा में प्रथम प्रयास में अखिल भारतीय रैंक 11 हासिल करने वाले श्री दीक्षित ने निजी क्षेत्र की आकर्षक संभावनाओं को त्यागकर राष्ट्र-निर्माण का मार्ग अपनाया। जून 2025 से हरिद्वार के जिलाधिकारी पद पर कार्यरत श्री दीक्षित ने अपने एक दशक से अधिक के अनुभव में ग्रामीण विकास, जल संरक्षण, डिजिटल नवाचार, संकट प्रबंधन और अच्छे शासन को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है। उनकी कार्यशैली में विश्लेषणात्मक दृष्टि, रणनीतिक सोच और टीम को प्रेरित करने की क्षमता का अनुपम मेल है। वे साबित करते हैं कि सच्चा प्रशासक वही है जो चुनौतियों को अवसर में बदलकर जनता की आवाज बने।
मयूर दीक्षित की शैक्षिक पृष्ठभूमि स्वयं में एक प्रेरणादायक कहानी है। उन्होंने आईआईटी कानपुर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बी.टेक किया और अपनी स्ट्रीम में रैंक 1 प्राप्त की। इसके बाद आईआईएम बेंगलुरु से मैनेजमेंट में पीजीडीएम (एमबीए समकक्ष) तथा नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी, बेंगलुरु से पर्यावरण कानून में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा पूरा किया। विश्व बैंक, आईएमएफ, एडीबीआई और एमआईटी जैसी संस्थाओं से पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट, इंफ्रास्ट्रक्चर, पीपीपी, एनर्जी इकोनॉमिक्स और ग्लोबल पॉवर्टी जैसे क्षेत्रों में प्रमाण-पत्र प्राप्त किए। इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट की इस मजबूत नींव ने उन्हें जमीनी प्रशासन में वैज्ञानिक दृष्टिकोण और रणनीतिक योजना बनाने की क्षमता प्रदान की।
उनकी प्रशासनिक यात्रा ग्रामीण स्तर से शुरू होकर जिला और सचिवालय तक फैली हुई है। उप जिलाधिकारी (एसडीएम) के रूप में उन्होंने हरिद्वार और रुड़की में कानून-व्यवस्था, साम्प्रदायिक सद्भाव तथा आपात स्थितियों का सफल प्रबंधन किया। रुड़की में दंगे की स्थिति में कर्फ्यू लगाकर तथा समन्वय स्थापित कर उन्होंने जन-विश्वास बहाल किया। मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) के रूप में अल्मोड़ा और ऊधम सिंह नगर में ग्रामीण विकास, गरीबी उन्मूलन, बुनियादी ढांचा निर्माण तथा आपदा प्रबंधन की जिम्मेदारियां संभालीं। उन्होंने क्षेत्रीय निरीक्षण, हितधारकों के समन्वय और आपातकालीन प्रतिक्रिया में उत्कृष्टता दिखाई।
जिला मजिस्ट्रेट के रूप में उनकी प्रगति उल्लेखनीय रही। रुद्रप्रयाग में जिला प्रशासन संभालते हुए उन्होंने स्थानीय उद्योग कार्यशालाओं का आयोजन कर एमएसएमई विकास को गति दी। उत्तरकाशी में उन्होंने मिशन इंद्रावती शुरू कर जल स्रोतों के पुनरुत्थान, पर्यावरण संरक्षण और सतत जल प्रबंधन का अनूठा मॉडल प्रस्तुत किया। जुलाई 2023 से जून 2025 तक टिहरी गढ़वाल के जिलाधिकारी के रूप में उन्होंने अतिरिक्त प्रभार के रूप में टिहरी बांध पुनर्वास परियोजना के निदेशक तथा जिला विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष का कार्य भी संभाला। यहां उन्होंने विकास पहलों, शिक्षा सर्वेक्षणों (स्कूल रेसी सिस्टम) और समग्र जिला प्रगति पर विशेष ध्यान दिया।
जून 2025 से हरिद्वार के जिलाधिकारी पद पर कार्यरत श्री दीक्षित ने अच्छे शासन, मानसून तैयारियों और कांवड़ मेला के सुचारू आयोजन को प्राथमिकता दी। हरिद्वार जैसे तीर्थ स्थल पर लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा, यातायात प्रबंधन और जन-सेवा सुनिश्चित करने में उनकी त्वरित निर्णय क्षमता सराहनीय रही। उन्होंने विभागीय समन्वय को मजबूत कर संसाधन-सीमित वातावरण में भी उत्कृष्ट परिणाम दिए।
मयूर दीक्षित की उपलब्धियां राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर पुरस्कारों से सजी हुई हैं। डिजिटल इंडिया अवॉर्ड्स 2022-2023 स्टार्टअप्स के साथ सहयोग कर ई-गवर्नेंस और तकनीकी-सक्षम जन-सेवाओं को बढ़ावा देने के लिए प्राप्त हुआ। राष्ट्रीय ग्रामीण विकास पुरस्कार 2019 और राष्ट्रीय जल पुरस्कार 2019 (भारत सरकार) उनके जल संरक्षण और ग्रामीण विकास कार्यों को समर्पित हैं। उत्तराखंड सरकार से मुख्यमंत्री उत्कृष्टता एवं अच्छे शासन पुरस्कार (2019 तथा 2020) प्राप्त कर उन्होंने जिला प्रदर्शन में नई मिसाल कायम की। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) से 2022 में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन वाले जिले का पुरस्कार मिला। शिक्षा सर्वेक्षण के लिए विकसित स्कूल रेसी सिस्टम जैसी नवाचारी पहल ने बाल अधिकारों और शिक्षा क्षेत्र को मजबूत किया।
उनके अन्य योगदानों में क्यूआर कोड आधारित कचरा ट्रैकिंग, टीम आधारित चुनाव प्रबंधन, उद्योग कार्यशालाएं तथा विकास वित्त, सार्वजनिक-निजी भागीदारी और वित्तीय प्रबंधन पर फोकस शामिल है। संकट प्रबंधन में उन्होंने प्राकृतिक आपदाओं, कानून-व्यवस्था और बड़े मेलों के आयोजन में अपनी क्षमता सिद्ध की।
श्री दीक्षित की कार्यशैली में कई विशेषताएं हैं। वे डिजिटल उपकरणों का उपयोग कर प्रशासन को पारदर्शी और तेज बनाते हैं। जल संरक्षण को पर्यावरण संरक्षण से जोड़कर सतत विकास का मॉडल तैयार किया। शिक्षा, स्वास्थ्य और गरीबी उन्मूलन में नवाचार लाकर अंतिम छोर तक पहुंच सुनिश्चित की। उनकी टीम को प्रेरित करने की क्षमता और अंतर-विभागीय समन्वय ने जटिल चुनौतियों को सफलतापूर्वक हल किया। हरिद्वार में कांवड़ मेला और मानसून तैयारियों में उनकी योजनाएं जन-उन्मुखी और सुरक्षा-केंद्रित रही हैं।
उत्तराखंड जैसे भौगोलिक रूप से संवेदनशील राज्य में श्री दीक्षित ने जल स्रोतों के पुनरुत्थान, डिजिटल शिक्षा और आपदा प्रबंधन को प्राथमिकता दी। उनकी पहलें “विकसित भारत 2047” के लक्ष्यों से सीधे जुड़ी हुई हैं। वे नियमित रूप से जन-संवाद कार्यक्रम आयोजित कर समस्याओं को सुनते और त्वरित समाधान देते हैं। उनकी यह शैली प्रशासन और जनता के बीच विश्वास का पुल बनाती है।
मयूर दीक्षित न केवल एक कुशल प्रशासक हैं, बल्कि एक संवेदनशील नेता भी हैं। उनका मानना है कि प्रशासन जनता की सेवा का माध्यम है। वे ईमानदारी, नवाचार और परिणामोन्मुखी नेतृत्व के प्रतीक हैं। आईआईटी टॉपर से लेकर एयर-11 तक की यात्रा और फिर हिमालयी जिलों में पुरस्कार विजेता कार्य — यह सब उनके अटूट समर्पण को दर्शाता है।
आज हरिद्वार जिला उनके नेतृत्व में अच्छे शासन, पर्यावरण संरक्षण और नागरिक-केंद्रित विकास की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। श्री मयूर दीक्षित, आईएएस, प्रशासनिक सेवा के क्षेत्र में एक प्रेरणास्रोत हैं। उनकी कहानी मेहनत, बौद्धिक उत्कृष्टता और जन-सेवा की अनुपम गाथा है। वे साबित करते हैं कि सच्चा प्रशासक वही है जो लोगों की मदद करे, उनकी आवाज बने और राष्ट्र-निर्माण में अपना योगदान दे। भविष्य में भी वे और बड़ी जिम्मेदारियों के लिए तैयार हैं तथा युवा प्रशासकों के लिए आदर्श बने हुए हैं।